चलि आ घरे - सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन'

रितुजाई सवनवां क बीत
मीत अब चलि आ घरे
परिजाई सपनवां प सीत
मीत अब चलि आ घरे।

लागे लहुक प अकासे क पहरा
लुतुरा बदरवा क लगहर लहरा
भेहिलाई पिरितिया क भीत
मीत अब चलि आ घरे।

लागे लहुक प अकासे क पहरा
लुतुरा बदरवा क लगहर लहरा
भेहिलाई पिरितया क भीत
मीत अब चलि आ घरे।

अंहकै अन्हार भरि, भादौ क रात
बहकै बयार धरि, केरा क पात
सुधि सुगुना अ पिंजरा सकीत
मीत अब चलि आ घरे।
आगी-लगै अस करे कमाई
पहर पहार दिन पारे न जाई
पतियो पर न पै परतीत
मीत अब चलि आ घरे।
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सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन'

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