संपादकीय

केहू दाँत बनवाई - दिलीप कुमार पाण्डेय

दाँत बनवावे भुअर डाॅक्टर लगे गईले
एगो दाँत के बनवाई एक हजार फरमईले।


बेसी बनवईला पर कुछ छूट हो जाई
हऽ आई ओही दाम में चार गो बन जाई।


बटुआ टो टा के भुअर भईले तईआर
दाँत बनावे के डाॅक्टर निकलले औजार।


दाब दूब के ठोक ठाक के दाँत लागल
भुअर अब खुश भईले बुढापा भागल।


रात के खूब चैन से भुअर सुतले
दाँत ना भेटाईल जब सबेरे उठले।


बिछावना तकिया चदर सभ झाराता
गले आला दाँत रहे ऊ कहाँ भेटाता।
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लेखक परिचय:-
नाम-दिलीप कुमार पाण्डेय
बेवसाय: विज्ञान शिक्षक
पता: सैखोवाघाट, तिनसुकिया, असम
मूल निवासी -अगौथर, मढौडा ,सारण।
मो नं: 9707096238

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