हवा में गजब के सरूर बाटे - जगन्नाथ

हवा में गजब के सरूर बाटे,
बात कुछ खास त जरूर बाटे।

लोर सब गिर रहल बाटे भुँइयाँ,
उनका रोवे के ना सहूर बाटे।

हमरा पासे दरद के थाती बा,
रउवा का बात के गरूर बाटे।

दुलार देके दुरदुरा दीला,
नीक अपने के ई दस्तूर बाटे।

बात इन्सानियत के कइलीं ह,
हुजूर बस इहे कसूर बाटे।
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लेखक परिचय:-
नाम: जगन्नाथ
जनम: 15 जनवरी 1934
जनम अस्थान: कुकड़ा, बक्सर, बिहार
परमुख रचना: पाँख सतरंगी, लर मोतिन के

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