ईमानदारी - डा उमेशजी ओझा

सुमित आपन गाँव के होनहार लइकन में सबसे तेज लईका रहले। इनका लईकाइये से पुलिस में काम करे के बड़ी शौक रहे। उ हरमेश कहत रहले की हमनी के देश के पुलिस चुप चाप बईठ गईल बा। कवनो जगह कवनो तरह के घटना घटे त देरी से पहुचेले पुलिस। जब हम बहाल होखब त हमार कोशिश रही कि जनता के आपन जी जान से सेवा करी जेकरा से देश मे हमार नाम होखे।

देखsत देखsत समय के पहिआ आगे बढत रहल , सुमित आपन पढ़ाई पुरा कsके पुलिस में दरोगा के पद प बहाल हो गईले। बहाली के बाद ट्रेनिंग में मिलल शिक्षा के अनुरुप उ आपन काम करत रहले। आवे वाला समय मे उनकर राज्य में ईमानदार पुलिस ऑफिसर में गिनती होखे लागल। सरकार भी उनका के ओहिजे भेजत रहल जहाँ केहू से काम ना होत रहे। उनकर भी मन करत रहे कि उहो बढ़िया शहर में जइते । बाकी उनकर ईमानदारी देखी के उनका के केहू बड़हन शहर में ना भेजत रहे। एहि बीच मे राज्य में राष्ट्रपति शासन लाग गईल। ओकरा बाद उनकर बदली राज्य के एगो नामी गिरामी शहर में हो गईल। जब रामपुर से उनकर बदली भईल आ उनका जाये के बेर बिदाई समारोह होत रहे त कतने आदमी उनकासे कटाक्ष करस की " का ए सुमित बाबू कहाँ से पैरबी लगवनी ह , जाई ओहिजा मज़्ज़ा काटी, मज़्ज़ा।"

"अरे का कहत बाड़s लोग , कुत्ता के पोछि देखsल बाड़ लोग। उ कबो सोझ ना होला , त भला हम कइसे सोझ हो जाईब। ओहिजा हम ओसाहि रहब। पुरा ईमानदार ।" एह प सुरेश बाबू.........

"देखी सुमित बाबू , बहुत आदमी के देखले बानी , ओह शहर में जाते सभ साँप जईसे आपन केचुल बदले ला ओसाहि आदमी आपन रंग बदल दिहेले।"

"देखी सुरेश बाबू, हमरा साथे अइसन ना होई। देख लेब। "

सुमित बाबू जाके कालीडीह में जवाईन कs लिहले। ओह शहर में गजब के स्थिति रहे। चौक प खाँड़ सिपाही के राह चलत मोटरसाईकिल प सवार लईकन सिपाही के पीछे से आके ठोकर मारीक़े भाग जात रहले। एक हाली सुमित बाबू एस0पी0 ऑफिस चलल जात रहले , त उनकर नजर अईसन हालत प पडल। उ आपन काम छोडिके ओह मोटरसाईकिल के पीछे पड़ी गईले। कुछे दूर जाके ओह मोटरसाईकिल सवार चालक के पकड़ लिहले। सुमित बाबू पुलिसिया रॉब में ओहनी के डाटत पुछले कि, " तहनी लोग अईसन बदमाशी काहे करत बाड़s ओह बेचारा सिपाही के डियूटी काहे नइखs करे देत।"

"ए दरोगा जी , तू हमनी के नईखs चिन्हत, ? बुझात बा एह शहर में नया आईल बाड़s। जा......जा.......आपन काम करs । एने ओने ध्यान देबs त लेनी के देनी पड़ी जाई। "

सुमित बाबू के खून अदहन निहन खाऊले लागल। ओहनी के पकड़ी के थाना ले जाये लगले। तबही उनकर मोबाईल फोन आवाज़ दिहलस ट्रिन........ ट्रिन........। सुमित बाबू फोन देखले त उ फोन उनकर एस0पी0 साहब के रहे। फोन उठवले , " जय हिंद सर।"

"अरे केकर गाड़ी पकड़ले बाड़s छोड़ द ओहनी के आ ऑफिस आव कुछ काम बा।"

"जी सर।"

ओह लईकन के छोड़ के सुमित बाबू एस0 पी0 साहब लगे गईले। " सुमित बाबू ईं शहर बड़ा बेकार बा। तनी होशियार रहिह । तहार बदली रकुनी थाना में करत बानी , जा जाके आजुए आपन काम प लागी जा। ध्यान दिह ओहिजा पहिले से ढेरे उल्टा पलटा होत रहेला।"


"चिंता मति करी सर्, सभ ठीक हो जाई।" सुमित बाबू एस0पी0 साहब के सलाम करत ऑफिस से निकल गईले। रकुनी थाना में जाके थाना प्रभारी के काम संभाल लिहले।

कुछे दिन बाद उनका मालूम भईल कि एहिजा त उनका नाम प नजायज पईसा के वसूली हो रहल बा। पईसा वसूले वाले के बोलाक़े ओकरा खिलाफ रिपोर्ट क दिहेले। उ सस्पेंड हो गईल। धीरे धीरे उनका थाना में नजायज काम बंद हो गईल। नीचे से लेके ऊपर तकले उनका ईलाका से पईसा गईल बन्द हो गईल। विभाग के सभ आदमी परेशान रहे लागल। आम जनता के भी परेशानी होखे लागल कि सुमित बाबू , कानून के विपरीत कुछो ना करत रहले। सभ चोर उच्चका उनकर ईलाका छोड़ दिहले ।

पहिले थाना के लोग नजायज वसूली करत रहे लोग। उ सभ काम बंद हो गईल रहे। उनका इलाका मे एगो सुदर्शन बाबू रहले जे एगो पुरान धुरान गाड़ी लेले रहले। ओकर कवनो कागज ना रहे ओहि से रोजी रोजगार चलावत रहले। अगर उ आपन गाड़ी से दूसरा जगह के सामान ले जात रहले त पुलिस से लुका चोरा के। एक दिन एगो साहूकार सुदर्शन बाबू से सउदा तय कके उनका गाड़ी प बिना कागज पतर के चाउर लाद के दोसरा शहर ले जाये लागल। ट्रक ड्राइवर ट्रक के जंगल के राहता से लेके जात रहे। जब कुछे दूर गईल त आगे राहता काटल रहे आ गहिडा में पानी लागल रहे । एह से गहिडा के अनुमान लाग पावत रहे कि कतना गहिडा बा। साहूकार आ गाड़ी के ड्राइवर आपस मे बात कके गाड़ी मेन रोड से लेके जाए लागल लोग। रोड़ प आईला प गाड़ी के खलासी गाड़ी से उतर के कुछ दूरी तक पैदल जा के ड्राइवर के राहता साफ रहे के इसारा कईलस, ओकरा बाद ड्राइवर धीरे धीरे गाड़ी आगे बढ़वलस। बाकी थाना के लगे आवते सुमित बाबू रोड़ प आगईले। आ गाड़ी पकड़ लिहले। चाउर के कागज मांगला प साहूकार, "साहेब ई बेचे के ना आपन घरे खाना खातिर ले जात बानी। " ओकरा बाद सुमित बाबू गाड़ी के कागज ड्राइवर से मंगले। बाकी गाड़ी के कागज त रहे ना। ड्राइवर के कहला प की मालिक से गाड़ी के कागज लेके आवत बानी। सुमित बाबू ड्राइवर के छोड़ दिहले। सांझी तकले कहा कहा से सुदर्शन बाबू बड़ी कोशिश कईले गाड़ी छोडवावे के बाकी सुमित बाबू गाड़ी ना छोडले।

कुछ दिन बाद सुरेश बाबू से सुमित बाबू के भेट भईल।

सुरेश बाबू, "सुमित बाबू, काहे अतहत मचवले बाड़ । केहू तहरा के ठीक नइखे कहत। अत्तनो ईमानदार बनल ठीक नइखे। जानत बाड़ ई विभाग में ईमानदार के समाधी बनेला। "

"ह सुरेश बाबू, बढ़िया से जानत बानी। ई मानी के चलत बानी की मरबो करब त लोग हमार नाम शान से लिही।"

दु महीना बाद राज्य में एगो पुलिस मीटिंग बुलावल गईल। मीटिंग में सबसे पहिले ईहे प्रश्न भईल कि " जे कबो घुस नईखे लेले , उ आपन हाथ उठाओ , ओकरा के पुरस्कार दिहल जाई। " भरल सभा मे एक आदमी हाथ उठवले उ रहले सुमित बाबू। उनका से कहल गईल कि आजु पुलिस प दु शब्द में आपन विचार राखी। सुमित बाबू आपना जगह प खाँड़ हो के बोलल शुरू कईले,...........

" आजु समाज मे पुलिस के छवि दिन प्रतिदिन घटते जा रहल बा। पुलिस एगो अईसन विभाग ह जवना से हर आदमी, हर समाज के हर समय वास्ता पड़ेला। बाकी जनता ई कहे से तनिको परहेज ना करे कि पुलिस के व्यवहार खराब बा। जबकि पुलिस देश के धड़कन ह। एगो सिपाही पुरा दिन धूप, हवा में चौक चौराहा प खाँड़ होके आपन डियूटी करेले। राति के जवन थोड़ बहुत आराम करे के समय मिलेला उहो कैद भरल जगह भा अइसन खुला जगह जहाँ कबो ओकरा साथे कवनो घटना घट सकत बा। अईसन जगह में समय बितावे के मजबूर रहले। जबकि आदमी के शरीर के काम के साथे साथ आराम के भी ओतने जरूरत बा।

आजु आदमी के शिकायत बा कि पुलिस के व्यवहार खराब बा , उ लोगन से बदसलूकी करेले। अब रउरे सभ सोची आवश्यकता से अधिक काम आ आराम के नाम प सिलन वाला बारीक का अईसन वातावरण में रहे वाला एगो सिपाही से ,का बढ़िया व्यवहार के उम्मीद कईल जाऊ ? अब पुलिस के लगे ई समस्या बा कि उ करी तब मरी आ ना करी त मरी।" सुमित बाबू के अइसन विचार प मीटिंग में थपड़ी के गड़गड़ाहट गूंजे लागल। सभ केहू सुमित बाबू के बधाई देबे लागल।

बाकी सुमित बाबू के ई कहा मालूम रहे कि उनका काम से लोग अतना भयभीत बा, उ त मात्र नियम के अनुसार काम करत रहले। जेकरा कारण लोग उनकर जान के भी दुश्मन हो गइल बा। सुमित बाबू मीटिंग से निकल के आपन मोटरसाइकिल चालू कईले आ चल दिहेले आपन घरे। बाकी रहता में एगो काल चक्र उनकर पीछा करत रहल। जब शहर से दूर एगो सुनसान जगह प पहुँचले त एगो बिना नंबर के गाड़ी उनका पीछे से आके उनका गाड़ी में जोर से धक्का मारी देलस, जेह से सुमित बाबू फेका गईले , ओकरा बाद धक्का मरेवाला गाड़ी उनका के रउदत चल गईल।

जिला में सुमित बाबू के दुर्घटना के सूचना मिलल। सभ केहू दउरल उनका लगे गईल, बाकी सुमित बाबू सब केहू के छोड़ी के जा चुकल रहले। विभाग उनका के भाव भींनी श्रद्धांजलि दिहलस। आजु सुमित बाबू नईखन बाकि उनकर ईमानदारी के मिशाल देत खूब गुणगान गावल जाला।
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लेखक परिचय:- नाम: डाo उमेशजी ओझा
पत्रकारिता वर्ष १९९० से औरी झारखण्ड सरकार में कार्यरत
कईगो पत्रिकन में कहानी औरी लेख छपल बा
संपर्क:-
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डिमना रोड मानगो
पूर्वी सिंघ्भुम जमशेदपुर, झारखण्ड-८३१०१८
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