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उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया - मुफ़लिस

उठा के घूघ सामने जे आ गइलि दुनिया,
अँजोरियो के अन्हरिया बना गइलि दुनिया।

बड़ी उम्मीद रहे, आदमी होई आपन,
एह खयाल के माटी लगा गइलि दुनिया।

जे गैर के भला में गला देकि चलि गइल,
ओकरो याद के बिल्कुल भुला गइलि दुनिया।

सगा होके, दगा लोग दे दिहलन आखिर,
रहम कहाँ बा? बेरहम जना गइलि दुनिया।

लोग साथे रहे जब तक कि बाजलि थइली,
हाथ खाली भइल गाती सुना गइलि दुनिया।

रहल ‘मुफलिस’ के ना विचार बुराई के कबो,
समझि उनको के बेगाना सता गइलि दुनिया।
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मुफ़लिस
अंक - 92 (09 अगस्त 2016)

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