संपादकीय

अक्षय कुमार पाण्डेय जी कऽ दू गो नवगीत

कहs गाँव कs घर कs केशव

बहुत भइल बेपर कs केशव,
कहs गाँव कs घर कs केशव!


ईंटा कs जंगल में हम तs
शहर जी रहल बानीं,
कंकड़-पत्थर नाता-रिश्ता
आपन इहे कहानी,
बाग बगइचा ताल नहर कs
कहs खेत पोखर कs केशव!


सँइचल आग गँवा के आपन
सपना जोड़त बानीं,
नून मिलल पानी में निबुआ
रोज निचोड़त बानीं,
लैनू माठा मीठ किकोरी
दूध दही सिकहर कs केशव!


पुतरी में आकाश उतारल
भूलि गइल अब मन ई,
धार संग हँस बहत रहे
अब थिर लागे जीवन ई,
पानी कs ऊ अकथ कहानी
नदिआ नाव लहर कs केशव! 

रोज बिछावत रोज चपोतत
मन अब फाट गइल बा,
शहरी नेत नियाव नीत
सइ टुक में बाँट गइल बा,
जुम्मन अलगू बुधिया होरी
धनिया आ गोबर कs केशव!
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आखर-आखर झूठ लगे अब

सपना कs पुल टूट गइल बा
नाव कहीं ना लउके,
आस - पास अन्हियार बहुत बा
गाँव कहीं ना लउके,
चाल करे घरियाल नदी में
हर पत्थर पर काई केशव
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई...........।  

रोज वसूले मौसम करजा
जिनिगी भइल जुआरी,
मुअतो नइखे भूख उड़ासी
मुँह से निकसे गारी,
पीठ कहे तs झूठ समझिहs
पेट कहे सच्चाई केशव! 
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
 कइसे लड़ीं लड़ाई...........।  


अब मन में मधुमास न उतरे
अब ना कोइल गावे,
रंग - महल में बइठ कल्पना
अब ना ओठ रंगावे,
आखर - आखर झूठ लगे अब
गीत गजल कबिताई केशव!
कइसे लड़ीं लड़ाई केशव! 
 कइसे लड़ीं लड़ाई...........।  
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लेखक परिचय:-


नाम: डॉ. अक्षय कुमार पाण्डेय
पता: रेवतीपुर (रंजीत मुहल्ला) 
गाजीपुर-232328 (उ. प्र .)
मो. नं. - 09450720229

अंक - 83 (7 जून 2016)

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