संपादकीय

केशव मोहन पाण्डेय जी कऽ तीन गो कबिता

ओरचन 

दुआरी पर 
किनारे देवाल से सटा के 
खड़ा कइल बा 
एगो खटिया,
ओकर हालत 
बड़ा डाँवाडोल बा 
ओकरा बिचवा में 
बड़ा झोल बा 
केहू के तरे सुतत होई 
बुझाते नइखे 
बाकिर 
ओरचन कसाइल बा 
ओरचन में 
दस गो गाँठ बा 
आ दोसरा ओर 
अइसन बिछवना बा 
जइसे राजा के ठाट बा। 

सबके माई-बाप 
इहे चाहेला 
कि आपन जामल 
दूध के कुल्ला करे 
अमृत के धार पिये 
भले माई-बाप 
जिनगी भर लुगरिये सीए। 

ओही दुआरी पर ना 
अनगिनत दुआरी पर 
खटिया खाड़ बा 
ओह संतानन खातिर 
माई-बाप के ढोवल 
पहाड़ बा। 

अनगिनत पूत 
सँचहू दूध के कुल्ला करत 
अमृत के धार पिअत बाड़े 
आ माई-बाप 
जिनगी के साँस गिनत 
आसरा के खटिया के 
नेह के ओरचन 
मर्यादा के गाँठ 
बान्ह-बान्ह कसता 
अभागी संतान 
सोचते नइखे 
कि ओकरा पर 
समय कितना हँसता। 
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मछरी 

तड़पत मछरी
तरसत मछरी
नटिका ले नीर बा तब्बो
नयन-नीर बन
बरसत मछरी।
जाल मोह में
निसदिन उलझत
नीर विलग मन
नाहीं सुलझत
असरा भोर
कहिया ले आई
खा के थरिया में
काहें छेंद कराई
सोंझ सड़कीया
सोंझ ना बाटे
मन के मरले
मन मलुआइल 
निरखत मछरी।।
बान्हल गाँठ में
सेन्हा चोर के
करिये मन बा
देहिया गोर के
अंखरत जल में
उछल-उछल के
समय साथ में
समय में ढल के
रोज चिरगवा
बारे हिया में
तब्बो अँजोर ला
हहरत मछरी।
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हाल गाँव के

अस मन बुझीं
हाल गाँव के
निमिया के
छुवत बयार के
पिपरा तल
लहरत छाँव के।

हुलस-हुलस
मन मोरवा नाचे
तोताराम
रामायन बाँचे
उछल उछल के
गुद्दी देखावे
कलाकारी निज पाँव के।

राग अलापे
कोइलर रागी
महोखा बाबा
बनल वैरागी
बिपत कटे ना
आजुओ कहीं से
पपीहा के नेहिल भाव के।

भाँति-भाँति के
चिरई-चुरुंग, जन
भाँति-भाँति के
सबके चिंतन
भाँति-भाँति
उपचार मिलेला
भाँति-भाँति के घाव के।

गइल राग-रंग
भइल छलावा
पइसल रोग,
बेअसर बा दावा
धिक्कारे मन
मइल देख के
मनई-हीन अलाव के।
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लेखक परिचय:-

2002 से एगो साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ के संचालन। 
अनेक पत्र-पत्रिकन में तीन सौ से अधिका लेख 
दर्जनो कहानी, आ अनेके कविता प्रकाशित। 
नाटक लेखन आ प्रस्तुति। 
भोजपुरी कहानी-संग्रह 'कठकरेज' प्रकाशित। 
आकाशवाणी गोरखपुर से कईगो कहानियन के प्रसारण 
टेली फिल्म औलाद समेत भोजपुरी फिलिम ‘कब आई डोलिया कहार’ के लेखन 
अनेके अलबमन ला हिंदी, भोजपुरी गीत रचना. 
साल 2002 से दिल्ली में शिक्षण आ स्वतंत्र लेखन. 
संपर्क – 
पता- तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र. 
kmpandey76@gmail.com
अंक - 80 (17 मई 2016)

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