संपादकीय

ननद तोरी बोलिया - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

हहरे ला हियरा हमार हो रामा। ननद तोरी बोलिया॥ 

पियवा गइल मोर सवत के देशवा 
अबो ले न भेजलस एकहु सनेसवा 
तलफ़े ई बिरही नार हो रामा। ननद तोरी बोलिया॥ 

सुगना बनाई मोर पियवा फंसवलस
गउवाँ गिरउवाँ के नउवाँ हंसवलस
भइल मोर जिनगी बेकार हो रामा। ननद तोरी बोलिया॥ 

उहो रे सवतिया कहीं बुड़ि धँसी जईती
चाहे कवनों रेलिया मे जाई कटी जईती 
लेती हम उहाँ निहार हो रामा। ननद तोरी बोलिया॥ 
-------------------------------
अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.