संपादकीय

तोरी मिठी बोलिया

सुतल हमार सइयाँ जागे हो रामा। तोरी मिठी बोलिया॥

रोज-रोज बोले कोइलरी सांझ हो सबेरवा
आजु काहे बोले अधि रतिया हो रामा। तोरी मिठी बोलिया॥

अब ले तऽ रहूऊ कोइलरी बनि के कोयलिया
अब तुहु भइलू सवतिया हो रामा। तोरी मिठी बोलिया॥

होखे दऽ बिहान कोइलरी बढई बोलउइबो
जरी से कटइबो सिरिसिया हो रामा। तोरी मिठी बोलिया॥
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अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)

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