संपादकीय

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी कऽ चारि गो चइता

एह पारी तोहके


जाए नाहीं देबि हम बहरवा ए रामा 
एह पारी तोहके। 

भले तनी कम मिली ओतने में रहबो
गाँवही में करबो गुजरवा ए रामा 
एह पारी तोहके। 

तहरे करेजवा से सटिके जुडइबो 
नाहीं चाहीं घूमे के शहरवा ए रामा 
एह पारी तोहके। 

पइसा के भूखे काहें देंहिया सुखइब 
हम पिअबि बिरह जहरवा ए रामा
एह पारी तोहके। 


पिया घरे अइले


रोंआ-रोंआ खुशिया समाइल ए रामा
पिया घरे अइले। 

मध दुपहरिया के तपल बटोहिया 
पनिया से जइसे अघाइल ए रामा
पिया घरे अइले। 

सपनो में देखीं अँकवरिया बलमु के 
आजु मोरा हियरा जुडाइल ए रामा
पिया घरे अइले। 

सिहरेला अंग-अंग खिलि गइले जोबना 
पोरे-पोरे रस भरि आइल ए रामा
पिया घरे अइले। 

केकरा ले बोलीं


पिया नाहीं चइत में घरवा ए रामा
केकरा ले बोलीं? 

बेला आ चमेली सभ फूल फूलि गइले 
जोबनो के फुलवा फुलइले ए रामा
केकरा ले बोलीं? 

करेला मोबाइले प आजु-काल्हु रोजहीं
बइठींले कइके सिंगरवा ए रामा
केकरा ले बोलीं?

सपनो में चुरिया खनकि जाले रहि-रहि
बहि जाला आँखि के कजरवा ए रामा
केकरा ले बोलीं ?

चइत महिनवा


बदलल समतवा सुहावन ए रामा 
चइत महिनवा। 

बिगत बरिसवा के भइले बिदाई 
नवका अनाज के ओसावन ए रामा
चइत महिनवा। 


ठुनकेली गोरिया बहरवा ना जइह 
करेला बलमुआ मनावन ए रामा
चइत महिनवा। 

सभ भाई मिलि जाले बढ़ेला परेमवा 
गंगा नियन घर होला पावन ए रामा
चइत महिनवा।
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लेखक परिचय:-


नाम: डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल
जन्म: बड़कागाँव, सबल पट्टी, सिमरी 
बक्सर, बिहार 
जनम दिन: 28 फरवरी, 1962
पिता: स्व. आचार्य काशीनाथ मिश्र 
संप्रति: स्नातकोत्तर हिंदी अध्यापक, केन्द्रीय विद्यालय
संपादन: संसृति
रचना: कौन सा उपहार दूँ प्रिय अउरी फगुआ के पहरा 
अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)

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