संपादकीय

नेता जी (बालगीत) - अभिषेक यादव

आवा लइको तोहे देखाई बेईमानी बे-ईमान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

बड़-२ नेता बा ढुकल घोटालन के थरिया में,
जनता भुईयां छछनत बा ई घुमे लो करिया में।
देश-धरम क चिंता ना फिकिर बा सन्तान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

चोर-लुटेरन के अब देखऽ सांसद अउर विधायक बा,
दारु-छोकरी में तन-गोतल सहूर ना कवनो लायक बा।
भिखारी से घटिया जिनगी बाटे ईहा किसान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

राहत-कोष के मैला-धन आधा मंत्री खाले स,
बचल-खुचल अधिकारी भी मिलके मौज उड़ावे स।
छिन-झपाटा हो रहल बा सरकारी अनुदान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

खसठुआ अफसर बन जाता चटकदार चपरासी बा,
हुशियार लइकन के मन में चढ़ल आज उदासी बा।
निपढ़ लो नेता बनऽता सुनलऽ कथा गुमान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

गिरगिट मुड़ी हिलावता नेता जी के चाल प,
सतरंगी नेता जी रंगले झूठ-कपट एहि खाल प।
अब त फेल भइल विज्ञानी ऐह मौसम के हाल प,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 

आवा लइको तोहे देखाई बेईमानी बे-ईमान क,
नेता जी से सुसूक रहल जनता हिन्दुस्तान क॥ 
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अभिषेक यादव











अंक - 74 (05 अप्रैल 2016)

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