संपादकीय

नशाबंदी - लाल बिहारी गुप्ता 'लाल'

अब से बिहार में दारु ना चली
सउसे विहार में मचल खलबली
अब से बिहार में................

बुधनी के माई खुश विया एही वात से
बुधनी के पापा दूर रहि हें शराब से
आधा पउआ के अब दाल ना गली
अब से बिहार में................

दारू जे पिही ऊ जुरमाना चुकाई
दारु जे बनाई अब जेल में ठूसाई
दारु के माफिया अब हाथवा मली
अब से बिहार में................

सुघढ़ सामाज बनी होई अब विकास
सबका से आगे चली आपन ई बिहार
छवि देख बिहार के दुश्मन जली
अब से बिहार में................

‘लाल बिहारी’ खुश बारे एही बात से
आच्छा काम भइल बा बड़ सौभाग से
मान ल बिहारी भाई रह ना टली
अब से बिहार में................
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लेखक परिचय:- 

नाम: लाल बिहारी गुप्ता 'लाल'
जन्म: 10 अक्टूबर 1974
जनम थान: ग्राम+पो. श्रीरामपुर, भाया - भाथा सोनहो,
जिला - सारण (छपरा),  बिहार-841460
शिक्षा: स्नातकोत्तर (हिन्दी)
सम्प्रति: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, उद्योग भवन, नई दिल्ली में कार्यरत 
संपादित कृतियाँ: समय के हस्ताक्षर (2006), लेखनी के लाल (2007), माटी के रंग (2008),  धरती कहे पुकार के (2009), हिन्दी साहित्यिक पत्रिका “साहित्य त्रिवेणी” क पर्यावरण विशेषांक क संपादन (2011) 
संस्थापक सचिव, लाल कला साहित्य एवं सामाजिक  चेतना मंच (रजि.) बदरपुर, नई दिल्ली-110044
भोजपुरी गीतन कऽ आडियो अउरी विडियो 
बिहार के दो विश्वविद्यालयन कऽ स्नातक तथा स्नातकोतर में भोजपुरी कविता 
संपर्क: 265 ए / 7, शक्ति विहार, बदरपुर, नई दिल्ली - 110044
फोन: 098968163073 // 07042663073
बलाँग: lalbihariilal.blogspot.com 
अंक - 75 (12 अप्रैल 2016)

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