संपादकीय

काशी धूम मचे - नन्दकुमार त्रिपाठी

काशी धूम मचे

काशी धूम मचे आज पशुपति खेलत फाग
काशी धूम---------

पशुपति खेलत फाग हो
आहो पशुपति खेलत फाग
काशी धूम --------

शंकर के कर डमरू बिराजै, भुत-बैताल लिये झाला
नाच कूद के होली गावे, पहिरे गले मुंड माल
काशी धूम----

साँची मगही गुलाबी बीड़ा, कंचन थाल मशाला
इतसे शंकर भांग धतूरा, चन्द्र विराजत भाल
काशी धूम ------

हीरा जड़ित कनक पिचकारी, नौ मन उड़त गुलाला
भर पिचकारी गौरा जी पर मारे, गौरा हो गयी लाल
काशी धूम मचै--------

भैरो के सिर पाग रंगाये, कुसुम रंगाये बैताला
नन्द कुँवर सिर सोहे गौरा के, शंकर के मृग छाल
काशी धूम----
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जनकपुर आयहु राज दुलार

फगुआ फाग खेलन को जनकपुर आयहु राज दुलार
फगुआ फ
फाग 
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आयहु राज दुलार हो
आहो आयहु राज दुलार
फगुआ फाग---

कोयल कुहुके पपिहा पिहके
देख बसंत बहारा
गृह-गृह युवति होली खेले
कंचन कलश हजार
फगुआ फाग -----

धौंसा धमके तबला ठनके, राजा जनक जी के द्वार
रंगमहल मिथिलेशकिशोरी
संग लिये सखियाँ हजार
फगुआ फाग -----

जनक दुलारी अबिर लिये झोरी, केसर राजदुलार
मचेउ धराधर रंगमहल में, शोभा अगम अपार
फगुआ फाग-----

रामजी रंग सिया पर चिड़के, सखियाँ देत ललकारा
नन्द कुमार अबिर अभरख से, भर गये शहर बजार
फगुआ फाग-----
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नन्दकुमार त्रिपाठी
अंक - 72 (22 मार्च 2016)

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