संपादकीय

भोजपुरी - मनोरंजन प्रसाद सिंह

भोजपुरी हमार ह भाषा 
जइसे हो जीवन के स्वासा।

जब हम ये दुनिया में अइलीं 
जब हम ई मानुस तन पइलीं।



तब से साथ रहल जे टोली 
से बोले भोजपुरिया बोली। 

हमहूँ ओही में मुस्कइलीं 
रोवली, गवलीं, बात बनवलीं। 

खेले लगलीं घुघुआ माना 
उपजल घाना, पवलीं खाना। 

चाना मामा आरे अइलें 
चाना मामा पारे अइलें। 

लेले अइलें सोन कटोरी 
दूध भात ओकरा में घोरी। 

बबुआ के मुँह में घुटुक 
गइल दूध अरु भात। 

ओकरा से पहिले पड़ल 
कान मधुर मृदु बात। 

ई हमार ह आपन बोली 
सुनी जनी केहू करो ठिठोली। 

जे मगही तिरहुतिया भाई 
ओकरो से हम कहब बुझाई। 

उहो बोलो आपन बोली 
भरो निरंतर आपन झोली। 

हिंदी ह भारत के भाषा 
उहे राष्ट्र के एगो आसा। 

हम ओकरो भंडार बढ़ाई 
ओहू में बोलब अरु गाइब। 
-------------------------
मनोरंजन प्रसाद सिंह
अंक - 70 (8 मार्च 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.