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गइल भइसिया पानी में - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

बागड़ बिल्ला नेता बनिहे 

करिया अक्षर वेद बखानिहे 
केहु के कब्जावल माल पर
मार पालथी शान बघरीहे। 

कुरसी से जब पेट भरल ना 
खइलस चारा सानी में। 
गइल भइसिया पानी में॥ 

सगरी मचईहे हाहाकार 
करीहे कुल उलटा ब्यापार 
मरन अपहरन रहजनी पर 
धारिहे आपन एकाधिकार। 

जनता तभियो मन परल ना 
डलिहे डेरवो रजधानी में। 
गइल भइसिया पानी में॥ 

नीमन मनई घर छोड़ परइहे 
इनकर पीछे उ उहवों जईहे 
लूट खसोट भा हेरा फेरी 
कवनों खेला न कबों भुलईहे। 

इनका बुझला अतनों सरल ना 
रेकड़ तुरीहे बेईमानी में।
गइल भइसिया पानी में॥ 

कुरसी खाति कुछुवों बोलल 
बिन जोगाड़ के धंधा खोलल 
जनता के मरजाद का होला 
कुकुर नीयन केनियों डोलल। 

जबले उनकर जेब भरल ना 
ओरहन गइल कहानी में। 
गइल भइसिया पानी में॥ 

पढ़ लिख के अब बस्ता ढोवल 
मउज करत बा भर दिन सोवल 
करम के हाल बा लोलक लइया 
आन्हर लग्गे अब बइठल रोवल। 

अतना देखलो पर भी मरल ना 
कुल बोरलस उ जवानी में।
गइल भइसिया पानी में॥ 

कतों घास के रोटी आउर कतहु भूखे पेट 
कबों कबों त पनियों से नाही होला भेंट 
पीढ़ी दर पीढ़ी बस करजे देहलें 
तबों घरे पर नाही चढ़ल फ़रेठ। 

अबो ले डरवार बनल ना 
भइल छेद ओरवानी में। 
गइल भइसिया पानी में॥


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लेखक परिचय:-

नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 
मैनेजिग एडिटर (वेव) भोजपुरी पंचायत
बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र: 
सी-39 ,सेक्टर – 3 
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.) 
फोन : 9999614657
अंक - 63 (19 जनवरी 2016)

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