संपादकीय

राजनीति के रोटी - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

बात कइसन गढ़ाइल, न सोहाईल ए बाबा। 

बात सोगहग रहल, ई नईखे पता।
घटना काहें भइल, बा केकर खता।
बेमतलब मे मनई पिसाइल, ए बाबा॥

धरम-जात-मजहब क खाका बुनल 
बिन प्रयोजन, बिना बात, आका चुनल
नीमन सनेहिया क डोर कटाइल ए बाबा॥

मुहजोरी के फेरु बवंडर उठल। 
बउरपन के कूल्ही रेकड़ टुटल।
सँवारे क मंतर कुल भुलाइल, ए बाबा॥

केहु पचरा कहल केहु खाली सुनल।
केहु झनकल , पटकल न केहु गुनल।
उहवाँ केहु न आपन भेंटाइल ए बाबा॥

सच्चाई के उहाँ महटियावल गइल। 
कड़ुवाहट के खाली बढ़ावल गइल।
निरा राजनीति के रोटी सेंकाइल ए बाबा॥ 
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लेखक परिचय:-

नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 
मैनेजिग एडिटर (वेव) भोजपुरी पंचायत
बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र: 
सी-39 ,सेक्टर – 3 
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.) 
फोन : 9999614657
अंक - 58 (15 दिसम्बर 2015)

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