संपादकीय

लुगरी से मरजाद ढकाइल - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

अनकस लागे लगल रिवाज 

करकस बाजन बिगड़ल साज 
पटवन मे जमीन धराइल 
लुगरी से मरजाद ढकाइल। 

खड़हर दुवारा टूटल खटिया 
कोरउरो चाउर नहीं मयस्सर 
बीपत भइल भूख मिटाइल 
लुगरी से मरजाद ढकाइल। 

भकठल चाउर चिंगुरल मनई 
दाल भइल पंछोंछर बा 
धसल गाल हड़री छितिराइल 
लुगरी से मरजाद ढकाइल। 

ढेर गाँवन के बा ई हाल
बच्चा बच्चा भइल बेहाल 
साक्षारता के बात भुलाइल 
लुगरी से मरजाद ढकाइल। 

कूल्ही चरित्तर महगी लिहलस 
चकमक लवकत बकुली धईलस
नीक दिनन के बाट जोहाइल 
लुगरी से मरजाद ढकाइल।

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लेखक परिचय:-


नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 
मैनेजिग एडिटर (वेव) भोजपुरी पंचायत
बेवसाय: इंजीनियरिंग स्नातक कम्पुटर व्यापार मे सेवा
संपर्क सूत्र: 
सी-39 ,सेक्टर – 3 
चिरंजीव विहार, गाजियावाद (उ. प्र.) 
फोन : 9999614657

अंक - 54 (17 नवम्बर 2015)

1 टिप्पणी:

  1. महंगाई के चलते गाँव-घर के दाशा बतावत सुन्नर पक्ति ।

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