संपादकीय

बिना भजन भगवान राम बिनु

बिना भजन भगवान राम बिनु के तरिहें भवसागर हो।।
पुरइन पात रहे जल भीतर करत पसारा हो
बून्द परे जापर ठहरत नाहीं ढरिकि जात जइसे पारा हो।।

तिरिया एक रहे पतिबरता पतिबचन नहिं टारा हो
आपु तरे पति को तारे तारे कुल परिवारा हो।।

सुरमा एक रहे रन भीतर पीछा पगु ना धारा हो
जाके सुरतिया हव लड़ने में प्रेम मगन ललकारा हो।।

लोभ मोह के नदी बहत बा लछ चौरासी धारा हो
सीरी टेकमन महराज भीखम सामी कोई उतरे संत हो।।
----------------टेकमन राम

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.