संपादकीय

हमार भैइसिया करत है योगा!

लोग योग दिवस के मोका बहुत उत्साहित रहल औरी उनकरी हिरदय से जाने केवन-केवन रस फुटत रहल। ओही पर बेबाक जी कऽ एगो व्यंग्य। 
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"ऐ बुधिया! सुना नहीं का रे!!!
ई अपना कुकूर (कुत्ता) भी योगा करत है रे!"
"साला हमका तो मालूमे नहीं भवा आज तलक की अपना कुकूरा भी योगा जानत है!!"
"हम ता योगा सीखे खातिर कैतना लोगन के हाथ पांव जोडा, कि भइया हमहऊं योगा सीखब!"

"अरे वाह कलुआ भइया! कुकूर योगा जानत बा चला चली सीख आई ...." "लेकिन भइया ई तोहका के बताइस ह??"
"अरे पगला....अपना सीताराम बाबू!"
"कलिहां तेलीविदन (T.V) मा बोलत रहेन कि योगासन तो डॉगी भी करता है, उसको योग का अच्छा नाँलेज ना है!"
"हम तो सोच रहा हूँ, काहे चक्कर मा पडें, कुकूरवा को देखी के सीखें योगा!"
"का भइया मज़ाक करत हो?"
"अरे हमार गईया, हमार गदहा, हमार भैइसिया सब ना योगा करत है!"
"खाली नाही करत तो हम तुम!"
"अरे भइया योगा प्रकृति का वरदान बा, छोट लडिका देखव कैइसन अपने बाडी के तोडत है मरोडत ह!!"

"सीता राम कौन नई बात बताएं?"
"अरे भइया ई ससुरी राजनिति हए, विरोध खातिर विरोध करए के पडत है!"
"एकठौ बात बताऍ भइया उनहू छूप छूप योगा करत है!"
"काहे छूप छूप बुधिया??"
"अरे बकलौल इस लिए की कौनव भगवा वाला न समझ लेए!!"
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लेखक परिचय:-

मूलनाम: अनित्य नारायण मिश्र 
जन्मतिथि: 2 अक्टूबर 1970 
शिक्षा: एम.ए. साहित्य रत्न 
पैतृक निवास:-
ग्राम-गनधमनापुर, तहसील- मड़ियाहूँ जिला- जौनपुर (उ.प्र.) 
वर्तमान पता:-
ई3/334 पथ संख्या-7 
सोनिया विहार, चौथी ढलान 
दिल्ली-110074
मो:- 08586008516
अंक - 33 (23 जून 2015)
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