संपादकीय

अंक - 33 (23 जून 2015)


अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मोका खुब सस्ता राजनीति भईल हऽ काँहे कि योग कहीं ना कहीं सनातन (हिन्दू) धरम से जुड़ल बा। ई बढिया नईखे। कुछ लोग योग के तुलना कुकुर, बिलार औरी सियार आदि से कईल हऽ खाली ए खाती कि कुछ मुस्लमान भाई लोगन के खुशी मिली। अजीबो गरीब हाल बा। सवाल ई बा कि का योग के अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलला औरी इज्जत बढला से मुस्लमान लोगन के केवनो तरह के नोकसान बा? का योग कईला से भारत से सनातन धरम के छोड़ि के बाकी धरम बिला जईहें सऽ? मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड योग के खिलाफ बयान जारी कऽ के का हिन्दू के मन में शक के बिया नईखे बोवत? काहे खाती एतना बवाल कईल गईल हऽ (चाहे जे कईले होखे; सत्ता पक्ष भा विपक्ष)? का ए बवाल के कऽ के धर्मनिरपेक्षता के बढावा दिहल जाता कि सांप्रदायिकता के? का ई अईसन बकत ना रहल हऽ कि मुस्लमान भाई लो आगे बढि के बकवास करे वाला लोगन के मूँह बन करवले रहित? भा ई मान लिहल जाओ कि खाली कुछ लोगन के राय देस के सगरी मुस्लमान भाई लो के राय हऽ (सीएसडीएस के रिपोर्ट कुछ औरी कहत बे)? 
चाँहे काँग्रेस के केवनो नेता होखस भा सीताराम येचुरी होखस भा जनता दल (यू) के केवनो मुस्लमान नेता होखस भा राम माधव होख ई सभ लोग राजनीति के करिया चादर से तोपाईल बा औरी रवीश कुमार औरी ओम थानवी नियर पत्रकार के लोग भुला जईहें। इनकर मये पाप लोग माँफ कऽ दी लोग; काँहे कि ई लोग हाथ जोड़ि के दू गो मोटे-मोटे लोर चूआ दी; कुछ निमन-नीमन बात बतिया दी भा कुछ बरियार तरक दे दी। बात ओरा जाई लेकिन ई सभ कऽ के जेवन अविश्वास के बिया दूनू वर्ग में बोवल जाता ऊ ए देस के काँहा ले जाई? कुछ लोग कहि दिहें कि देस में कट्टरता फईलावल जाता। हमार सवाल सगरी देस बा कि काँहे हिन्दू धरम से जुड़ल हर विषय औरी भाव के कट्टरता के नाँव दे दिहल जाता? का ओकरा अपना अतीत से जुड़ल धरोहर औरी परम्परा बचावे औरी बढ़ावे के अधिकार नईखे? भा ए देस में हिन्दू धरम जुड़ल हर चीझ के डंटा ले के देस के बहरा लखेद दिहल जाओ? ई कईसन न्याय बा? काँहा गईल गंगा-यमुनी संस्कृति जेवना के ढोल पिटल जाला औरी कबो-कबो ओकरी नाँव पर नंगा नाच? अगर धरम निरपेक्षता के एतना खयाल बा तऽ काँहे ना होली, दिवाली, ईद औरी क्रिसमस आदि तेवहारन पर रोक लगा दिहल जाओ काँहे कि ई सभ तेवहार धरम के सीधे-सीधे जुड़ल बाड़े सऽ? योग तऽ बस निरोग रहे के एगो ढँग मात्र भर बा। जेकरा रुचे खाये ना तऽ मोरी में बहवा दे; के पूछत ता? 
अईसन नईखे के 21 जून के नाया-नाया योग उपराईल हऽ भा तहीए से लोग योग करे लागल हऽ। कई हजार साल से भारत में योग बा तहिया से जब ए देस के नाँव भारत ना रहे। करोड़न लोग रोज घरे, दुआरे, पार्क में औरी क्लब में योग करत बाड़े। योग, आयुर्वेद औरी शास्त्रीय संगीत भारत बहुत बड़ ज्ञान बा जेवन एगो धरोहर के रुप में चलत औरी बढ़त आ रहल बा। औरी हमरा औरी पूरा भारत के विश्वास बा कि सभकरा एके ले के गर्व बा औरी इन्हनी के मान्यता मिलला से सभकर छाती चाकर होई; परान ना जाई।
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"ऐ बुधिया! सुना नहीं का रे!!!
ई अपना कुकूर (कुत्ता) भी योगा करत है रे!"
"साला हमका तो मालूमे नहीं भवा आज तलक की अपना कुकूरा भी योगा जानत है!!"
"हम ता योगा सीखे खातिर कैतना लोगन के हाथ पांव जोडा, कि भइया हमहऊं योगा सीखब!"
"अरे वाह कलुआ भइया! कुकूर योगा जानत बा चला चली सीख आई ...." 
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प्रेम बान जोगी मारल हो कसकै हिया मोर।।
जोगिया कै लालि-लालि अँखियाँ हो, जस कॅवल कै फूल
हमरी सुरुख चुनरिया हो, दूनौं भये तूल।।
जोगिया कै लेउ मिर्गछलवा हो, आपन पट चीर
दुनौं कै सियब गुदरिया हो, होइ जाबै फकीर।।
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<<< पिछिला                                                                                                                        अगिला >>>

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