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संपादकीय: अंक - 29 (26 मई 2015)

बिकास औरी भूमंडलीकरन के ए जुग में गाँव बहुत पीछे छूटत जात बा। कुछ दसेक साल पहिले जेवन महता गाँव के रहे ऊ आज कहीं लऊकत नईखे। बिकास के ए भागा-भागी में गाँव खाली एगो सबद औरी जगह बनि के रहि गईल बा लेकिन गाँव ना तऽ खाली एगो सबद हऽ नाही खाली एगो जगह। गाँव एगो संस्कार हऽ औरी ओ सभ्यता के निसान हऽ जेवना के हमनी के पुरखा बड़ी मेहनत से खड़ा कईले रहलें। ई ऊ संस्कार जाहाँ अदिमी खाली अदिमी ना रहि जाला बल्कि अदिमी के समूह बनि जाला। ओकरी जिनगी में सभकर हक हिस्स होला तऽ सभकी जिनगी में ओकर।
अंक - 29 (26 मई 2015)
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