संपादकीय

सुरमा आँखी में नाहीं ई तू छुलावत बाटऽ

सुरमा आँखी में नाहीं ई तू छुलावत बाटऽ। 
बाढ दूतर्फी बिछूआ पै चढ़ावत बाटऽ।।
अत्तर देही में नाहीं तू ई लगावत बाटऽ।।
जहर के पानी में तेरुआर बुझावत बाटऽ।।
कहलीं के काहें आँखी में सुरमा लगावेलऽ ?
हँस के कहलैं छुरी के पत्थर चटाइला।।
पुतरी मतिन रक्खब तुहें पलकन के आड़ में।
तोहरे बदे हम आँखी में बैठक बनाइला।।

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