संपादकीय

फेरु मति कहिह कि भोजपुरी बोली हS कि भाखा ..!!

कहS तारे कि भोजपुरी भाखा हS कि बोली ..
भोजपुरिये दुहि दुहि खइल चुसाव जनि गोली ..
भोजपुरी ना अपनईत तS केहू ना तोहे चिन्हित ..
भांडी में लुकाईल रहित केहू नाहिं तोहे किनीत ...
भुला जनि भोजपुरीये तहारा रोटी के आधार हS ..
देश विदेश में झंडा गड़ले बा ई भाषा के सरदार हS ...
हमार भोजपुरी खलिसा भाषा ना देश के संस्कार हS ..
भरल पुरल वर्ण भण्डार से आघाईल ऐकर बाखार हS ...
इचिको संदेह मति करिह ताहरो पS ऐकर उपकार हS ..
झुठहूँ के उलझाव मति ना तS तोहरा पS धिरिकार हS ...
--------------------विजय मिश्र बाबा

अंक - 18 (10 मार्च 2015)

1 टिप्पणी:

  1. vijay mishra "Baba"10 मार्च 2015 को 11:25 pm

    भोजपुरी के भोज में अबहीं ले कुल्हि नोंचि के खायेवाला अउरी पत्तल फेंक के हाँथ धोये वाला अईले, अब साँचों के अपाना भोजपुरी के जोगावे अउरी मान सम्मान खातिर भोजपुरिया लोग के जोडीआवे के परि .... बड़ी दुलरि हिय हमार भोजपुरी ...

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