संपादकीय

कन्हैया प्रसाद तिवारी जी के तीनगो कबिता


कन्हैया प्रसाद तिवारी जी जिनगी के अलगा-अलगा रंग अपनी कबिता में भरे के परियास करेनी औरी बहुत हद ओमे सफलो बानी। आप सभका खातिर उँहा के तीनगो कबिता जेवन अलग भाव लेले बाड़ी सऽ
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          दूध के धोवल केहु नईखे

दूध के धोवल केहू नईखे, सबके मगज में खोट बा।
जुबान के इज्जत केहू करे ना, सबके नजर में नोट बा॥

नोट के खातिर आपन अनकर, लोग भुलाईल कान्ह।
तन के माटी सभे सँवारे, तू प्रेम के गाँठरी के बान्ह॥

बिष कुंभ में क्षीर भरल बा, नीर आँख से टपकत बा।
अनकर सेनुर राह चलत में, लोगवा काहें लपकत बा॥

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       कउड़ महातम

लईका बुढ़ जवान सभके बा कउड़ से पहचान
जात-पाँत के भेद भुलाके बचावे सबकर जा॥

पोसूआ कूक्कूर चाहें बिल्ली
केहू ना उड़ावे कउड़ के खिल्ली॥
जाड़ा में बा कउड़ धरहर
पास बईठ के होईं फरहर॥

कतनो ओढ़ी कम्बल रजाई
सभे कउड़ के महिमा गाई॥

कउड़ में बा देव निवास
जाड़ा में सभके लागे खास॥

कउड़ के केहू लात ना मारे
गदगद हो के गोड़ पसारे॥

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      सपने में सखी साजन अईले

सपने में सखी साजन अईलें, हमसे प्यार जतवलें
गोदी में बईठा के हमके, हँसि-हँसिके बतिअवलें॥

खुलल आँख त सेज बा सून, तूरलें प्यार के डोरी
दिल में धधके आग हमरा, मतिया के भरमवलें॥

लोर आँख से सूखत नईखे आँचर से लाज पोंछत बानी
आपन दरद के दिल में रखीं केकरा से हम करीं बयानी॥

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लेखक परिचयः
सेवा निवृत वारंट अफसर भारतीय वायु सेना
ग्राम:- हथडीहाँ, बिक्रमगंज
जिला:- रोहतास, बिहार

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