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आजि काल्हि गइया के दसवा के देखि-देखि

आजि काल्हि गइया के दसवा के देखि-देखि
हाइ हाइ हाइ रे फाटति बाटे छतिया।

डकरि-डकरि डकरति बाटे राति दिन
जीभिया निकालि के बोलति बाटे बतिया।

ताहू पर हाइ निरदइया हतत बाटे
गइया का लोहू से रंगत बा धरतिया।

अगवाँ के दुख-दुरदसवा के सोचि-सोचि
कोटि जुगा नियर बीतति बाटे रतिया।।
------------दूधनाथ उपाध्याय
अंक - 8 (11 दिसम्बर 2014)

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