नयकवा - बाबा भिखारी गोस्वामी
सूतल रहती हम सैंया सुख-सेजिया से, सपना देखलि अजगुत रे नयकवा । जब-जब मन परे नैना से नीर ढरे, धर-थर कॉंपेला करेज रे नयकवा। बेटी अनबोलता के मँग...
सूतल रहती हम सैंया सुख-सेजिया से, सपना देखलि अजगुत रे नयकवा । जब-जब मन परे नैना से नीर ढरे, धर-थर कॉंपेला करेज रे नयकवा। बेटी अनबोलता के मँग...