पइसा विकासे कऽ खाय गइलै,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
एमएलए एमपी औ गाँव परधानी।
जीत होइ जाला तऽ काटैले चानी।
जन हित कऽ सपना भुलाय गइलै,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
मीठ मीठ बातिन के घुट्टी पियावैं।
भाषण से जनता के जिव जुड़वावैं।
नून और निंबुआ चटाय गइलैं,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
चुन जालैं जहिया ले नाचैलैं नंगा।
पोषैलैं गुण्डा करावैले दंगा।
पुश्तैनी धंधा बनाय गइलैं,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
नौकर रखालैं तऽ उ साहब कहालैं।
इन्हीं के सह पा के चूस चूस खालैं।
गर्दन पर छूरा चलाय गइलैं,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
भीतर से करिया उपर उजराई।
गाँधी के नेहरू कऽ देतौं दोहाई।
गंगा के उल्टी बहाय गइलैं,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
एक ओर मारै उधाय महंगाई।
बिजुरी क बिल 'बावला' का बताई।
चमचन के साधे धधाय गइलैं,
आयल चुनाव फेरु आय गइलैं॥
----------------------------------
लेखक परिचय:-
जनम: 1 जून 1922, भीखमपुर, चकिया
चँदौली, उत्तर प्रदेश
मरन: 1 मई 2012
रचना: गीतलोक, भोजपुरी रामायण (अप्रकासित)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें