बदरा एतनी कहल मोरा करिहऽ।
बदरा…
जबने हि देसवा पिया मोरा होइहें,
रिम झिमि जाइ बरसिहऽ।
बदरा…
बीते असाढ़ सावन घर आवे,
बैरिन बुनियाँ हो बिरहा जगावे,
हमरी याद दिअइहऽ।
बदरा…
कठिन कठोर निरमोहिया क जियरा,
सुधिया जो आवे मोरा भीजि उठे कजरा,
मोतियन नीर देखइहऽ।
बदरा…
अन जल अउरी सिंगार भइलें सपना
सरकि उठल मोरा हाथे कऽ कंगना,
सगरी बात बतइहऽ।
बदरा…
केतना कहीं तोसे चतुर सयाने,
मानें तऽ मानें पिया जो न मानें,
तऽ, गरजि बरसि समुझइहऽ।
बदरा…
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लेखक परिचय:-
नाम: भोलानाथ गहमरी
जन्म: 19 दिसंबर 1923
मरन: 2000
जन्म थान: गहमर, गाजीपुर, उत्तरप्रदेश
परमुख रचना: बयार पुरवइया, अँजुरी भर मोती और लोक रागिनी

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