कलकतवा से मोर पिया - महेन्द्र मिसिर

कलकतवा से मोर पिया
अइहें कि दू ना?

चार महीना
जाड़ा-पाला के दिनवाँ,
पिया हमके रजइया
ओढ़इहें कि दू ना?
कलकतवा से...

चार महीना
पसेनवाँ के दिनवाँ,
पियवा रसे-रसे बेनिया
डोलइहें कि दू ना?
कलकतवा से...

चार महीना
बरसात के दिनवाँ,
पियवा हमरा के छातावा
ओढ़इहें कि दू ना?
कलकतवा से...

कहत महेन्दर
पिया छछनेला जिया
पिया हमरो जवनियाँ
जुरइहें कि दू ना?
पिया हमरो आसरवा
पुरइहें कि दू ना?
कलकतवा से...
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लेखक परिचय:-
जनम: 16 मार्च 1886
मरन: 26 अक्टूबर 1946
जनम स्थान: मिश्रवलिया, छपरा, बिहार
रचना: महेंद्र मंजरी, महेंद्र विनोद, महेंद्र चंद्रिका,
महेंद्र मंगल, अपूर्व रामायन अउरी गीत रामायन आदि

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