संपादकीय: मैना: वर्ष - 7 अंक - 120 (अक्टूबर - दिसम्बर 2020)

चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह 'आरोही' 

केवनो भाखा के साहित्य के विकास के प्रक्रिया में जरूरी बा कि लोग हर रचनाकार के रचनन के बिना पूर्वाग्रह के पढ़ि के जाँचो अउरी परखो। हालाँकि ई कई बेर बहुत मुश्किल होला काँहे के अक्सर रचनाकार के रचना से पहिले रचानाकार के छवि के चर्चा लोगन तक पहिले चहुंप जाला अउरी ई कई बेर रचनन के प्रति अन्याय करे खाती लोगन के जाने-अनजाने मजबूर कऽ देला। जब केवनो रचनाकार चर्चित रहेला तऽ ई बहुत साधारण बात होला। एह स्थिति में बिसेस रुप से आलोचकन खाती ई बहुत जरुरी बा ऊ भाखा अउरी रचना दून्नु के प्रति पूर्वाग्रह के मुक्त रहे। 
भोजपुरी के अनेक साहित्यकारन के संस्मरणन (इयादों के झरोखा में अउरी एह अंक खाती आइल) पढ़ला के बाद ई साफ बा कि आरोही जी खाली साहित्य सृजन में ना लागल रहलें बलुक उहाँ के भोजपुरी साहित्य के विकास खाती जेवन उदजोग संभव रहे परियास कइले बानी। देस के अलग-अलग हिस्सा में कवि सम्मेलन के आयोजन, अनेक पत्रिकन अउरी लोगन के पुस्तकन के प्रकाशन में सहजोग अउरी उहाँ के व्यक्तिगत परियास के बहुत सगरी संस्मरण सोझा आइल बा। ना खाली एतने बलुक दोसरा साहित्यकारन के साहित्य के खुद के व्यकतिगत परियास से लोगन तक पहुंचावे के हर संभव उदजोग तक कइले बानी (आचार्य हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन)। एतने ना बलुक लोगन के ए आरोप कि ‘भोजपुरी गद्य नइखे लिखाइल’ के उत्तर में उहाँ भोजपुरी कथाकोश के संग्रह कइले बानी कुल्ह 4,877 भोजपुरी कहानीन के जानकारी उपलब्ध बा। ई सभ गुण उहाँ के भीतर के एक्टिविस्ट के परिचय देत बा। 
केवनो रचनाकार के साहित्यकर्म समय के कालखन्डन में कई दौर से गुजरेला। एह दौर से गुजरत रचनाकार अपना भाव अउरी बिचार संप्रेषण में तरह-तरह के उतार चढ़ाव अउरी बदलाव के देखे ला। ना खाली एतने बलुक रचनाकार समय के माँग अउरी अपनी अन्दर घुमड़त भाव के हिसाब के अलग-अलग विधा के सहारे आपन बात कहे के परियास करेला। अपनी एह परियास में रचनाकार कुछ कालखण्डन के बहुत बेहतर तरीका से लोगन के सोझा रखेला तऽ कुछ कालखण्डन के अपना रचनन में औसत तरीका से संप्रषित कऽ पावेला। कई बेर रचनाकार केवनो खास विधा में बहुत निखर के सोझा आवेला तऽ कई बेर खास बिसय के संप्रेषित करे में महारत हाशिल कऽ लेला। ओहीजा रचनाकार कई बेर अनेक विधन आ बिसयन में प्रयोग करे के परियास करेला बाकिर ओह विधा बा बिसय में प्राकृतिक पकड़ ना भइला के कारन बहुत औसत तरीका से आपन बात कहि पावेला। रचनाकार के एह जतरा के बिसेस बात ई बा ई लगभग सगरी रचनाकारन के साथे अलग-अलग तरह से होला। 
आरोही जी के रचनाकर्म के पढ़ला पऽ ई बहुत साफ हो जाता कि साहित्य के बहुत कम विधा बाड़ी सऽ जेवना उहाँ के आपन हाथ आजमावे के परियास नइखी कइलें। कहानी, एकांकी, नाटक अउरी पद्य के लगभग हर विधा में उहाँ के लिखे के परियास कइले। उहाँ का ना खाली भोजपुरी में लिखले बानी बलुक हिन्दियो में कुछ गजल लिखले बानी। संगही उहाँ के साहित्य में हर तरह के परियोग के कोसिस कइले बानी अउरी सायेद इहे कारन बा कि उहाँ के बहुत जयादे साहित्य के सृजन कइले बानी। चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह ‘आरोही’ के रचनन अउरी जीवन के अब तक आ भविष्य के मूल्यांकनन में लोगन के आग्रह अउरी पूर्वाग्रह के उपस्थिति से इन्कार ना कइल जा सकेला। 
आरोही जी के रचनाकर्म के बिसय बस्तु बहुत व्यापक बा। जीवन, धरम, लोक-समाज आ राजनीति सहित लगभग हर बिसय पऽ उहाँ के कलम चलल बा। बिसय बस्तु के व्यापकता एक ओर उहाँ एगो बहुत जागरुक अउरी संवेदनशील रचनाकार के रूप में लोगन के सोझा ले आइल बा तऽ दूसरी ओर बिसय बस्तु इहे व्यापकता उहाँ के गद्य रचनन के बहुत हद संप्रेषण सपाट बना देले बा। हालाँकि रचना के कथ्य अउरी संप्रेषण के मूल्यांकन बिसय बस्तु के आधार होला। बाकिर बात जब पद्य रचनन के आवेला तऽ पद्य रचनन पऽ ई आरोप ना लगावल जा सकत बा। ‘गोपी गीत’ संग्रह आरोही के संभवतः सभसे बरियार रचना बे। 
‘बड़प्पन’, ‘देशद्रोही’ अउरी ‘पागल’ जइसन मजबूत बिसय बस्तु कहानी संप्रेषण अउरी कथ्य के आधार पऽ सपाट नजर बाड़ी सऽ। खासकर ‘बड़प्पन’ कहानी के कैनवॉस एतना बड़ बा कि ई कहानी अपनी संरचना, कथ्य अउरी संप्रेषण के दूसर अन्य तत्वन अउर काम माँगत नजर आवते। हालाँकि इहो कहानीकार के गुण बा कि ऊ अइसन कहानीन के कहे के परियास करत बा। एही तरे ‘पागल’ कहानी के बिसय बस्तु बहुत साहसी बा अउरी आज के समइयो कहानी समकालीन लागत बे। ‘देशद्रोही’ कहानी पढ़ला के बाद कहियों से ई ना लागे ला ई कहानी कई दशक पुरान कहानी हऽ। बाकिर एगो पक्ष इहो बा कि सांच कहे वाली कहानी अक्सर सपाट होली सऽ। अइसन कहानीन में बनावट के बदले साहस होला। प्रेमचंद्र के बहुत कहानी सपाट बाड़ी अउरी बहुत साहसियो। 
आरोही जी कई एकांकी संग्रह सहित कई दर्जन एकांकी लिखले बानी। जेवना में से कईगो एकांकी बिसय बस्तु के हिसाब बहुत उच्च स्तर के बाड़ी सऽ बाकिर कहानिए नियर रचानाकार अपना एकांकीन के ओ ऊँचाई ले नइशीं पहुँचा पावत जेवना के ऊ एकांकी हकदार बाड़ी। कई एकांकीन में संवाद बहुत सपाट हो जाता। ‘साक्षात लक्ष्मी’ अपनी बिसय बस्तु के कारन बिसेस बे बाकिर जेवन ट्रीटमेंट के हकदार ई एकांकी बे ऊ ऊँचाई नइखे मिल पावल। 
पद्य के बहुत कम विधा बा जेवना में आरोही जी रचना नइखे रचले। इहाँ के पद्यन बिसेस रुप से ‘गोपी गीत’ के पढ़ा ले बाद इहे लागेला कि आरोही जी मूल रुप से कवि बानी बाकिर भोजपुरी साहित्य के माँग के देखत उहाँ के गद्यो के रचना कइले बानी। उधो जी के संबन्ध में उहाँ अभिव्यक्ति बहुत उच्च कोटि के बा। जीवन, मन अउरी हृदय के भाव के समझ अउरी अभिव्यक्ति निश्चित रुप से सराहनीय बा। 
‘ऊधो कायम रही उम्मीद।'
‘झंझावात बवंडर तूफाँ, आई ना भय खाइब 
भँवर चीर मँझधार करेजा, नाव बढ़ावत जाइब।'
आ 
‘मिले मुक्ति विपरीत समर ना, श्यामें शयाम पुकारब 
समय बिषैला सदा दंश दे, बा विश्वास न हारब।'
एह पंक्तिन के पढ़ला के बाद रचना के अभिव्यक्ति के स्तर स्पष्ट रुप से पता चलत बा। 
एह अंक में आरोही जी पऽ जेतना लिखाइल बा ओकरा से अधिका के जरुरत बा अउरी उहाँ के रचनाकर्म के कई दृष्टि से देखे के जरूरत बा। संपादक के रुप में जब एह अंक के संकल्पना मन में आइल तऽ उम्मीद रहे के आरोही जी के रचनाकर्म आलोचनात्मक लेखन के संख्या अधिका रही अउरी उहाँ के समग्र रचना के मूल्यांकन संभव हो पाई। बाकिर एह अंक में ई संभव ना हो पावल। एह अंक में संस्मण के संख्या आलोचना के तुलना में अधिका हो गइल बा। हालांकि संस्मरण के आधार पऽ उहाँ के जीवन के मूल्यांकन आसान हो जात बा। अंत में भोजपुरी साहित्य जगत से एगो निहोरा बा। जदि वर्तमान साहित्यकार वर्तमान अउरी पुरान साहित्यकारन के रचनाकर्म के मूल्यांकन का करी तऽ के करी? 
राजीव उपाध्याय 
संपादक 
मैना
मैना: वर्ष - 7 अंक - 120 (अक्टूबर - दिसम्बर 2020)

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