गणेश नाथ तिवारी 'विनायक' के नौ गो कविता

1.

उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल
चारुओर चिडियन के चिहचीहान हो गइल।

उठ धरती मइया के चरण दबाव
दुअरा पर गइया के लेहना लगाव
दुधवा पी के बबुआ जवान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

सांझे सवेरे रोज करेलऽ खेतीबारी
तबे कुल अनजा पहुँचेला दुआरी
देसवा एहीसे महान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

केतनो उगइब तेलहन अउरी दलहन
मिली नाही तोहके रुपइया तनिको मोटहन
व्यवसायीयन के खूबे सकान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

खेती के मोल जदि ऊँचीत ना भेटाई
बाल बच्चा हमार कइसे पोसाई
इहे सोचि के मन परेशान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

नेता मंत्री के बढ़ल वेतन आ भाता
किसानन के कबो कुछ्वु ना भेंटाता
झूट नेतन के सगरो जबान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

नइखे किसान के केहु पुछवाइया
नेता व्यापारी भा बाबू होखे भइया
अरजी करत गणेश के थकान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल
चारुओर चिडियन के चिहचीहान हो गइल।
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2.

भारत में अइसन, विश्वविद्यालय बा पढ़ावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।

चुनाव नियराते, व्यंग कसऽता लोग खूब
जातिये में, बाँटे खातिर लगावता लो हूब
गोड़ धऽ के कहतालो,वोट डलवावे के
जातिये जजाति हो गइल बा,नेता उपजावे के।

चुनाव के पहिले तऽ, हाथ-गोड़ जोड़ता लो
जनता के चारु ओर से गिट्टी लेखा फोड़ता लो
पाँच साल कम पड़ि जाला, वादा निभावे के
जातिये जजाति हो गइल बा,नेता उपजावे के।

पहिले राग रहले, हिन्दू-मुस्लिम के आलापत
मन्दिर-मस्जिद बनी,अब सभकर सलामत
अब इंतजार होता, कोर्ट के फैसला आवे के
जातिये जजाति हो गइल बा,नेता उपजावे के।

काश्मीरी पण्डितन पर,केहु मुह नाही खोलल
रोहिंगयन खातिर बाटे,सगरीन के मुह डोलल
एससी एसटी एक्ट से काम भइल, माहौल गरमावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।

सत्ता के सुख खातिर, बाटे लो खखाइल
जीतला के बाद जाने,कहा बा लो पराइल
बेकल बा लो लाउंड्री में,चड्ढी धोवावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।

जवने आइल सत्ता में,तवन लूट के खइलस
सात पुहुत खातिर,इंतजाम उहो कइलस
जनता खातिर, योजना खाली टीबी पर देखावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।

हिन्दू के बंटा गइले, सवर्ण दलित दुनु में
मुस्लिम बंटा गइले, सिया अउरी सुन्नी में
अगिला चुनाव रही,इसाई जैन लड़ावे के
जातिये जजाति हो गइल बा,नेता उपजावे के।

सोसल मीडिया पर,खाली हवा उड़sता फरजी
केहु मानेला सांच,केहु करेला ख़ाली अरजी
सरकार के काम बा, खाली ध्यान भटकावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।

पढ़ल लिखल लोग, सगरो भइल बेरोजगार
अनपढ़ चलावे सगरो, बाबा वाला कारोबार
कहेले गणेश चलs, उनइस में अजमावे के
जातिये जजाति हो गइल बा ,नेता उपजावे के।

भारत में अइसन, विश्वविद्यालय बा पढ़ावे के
जातिये जजाति हो गइल बा, नेता उपजावे के।
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3.

पक्का के मकान बनल छूट गइल मड़ई
लोहा के गेट लागल बिला गइले बढ़ई।

गाव भइल शहर लजात नइखे लोगवा
बहरा निकले घरे से इज्जत छोड़ घरई।

पेड़ खूंट कट गइल बदल गइल मौसम
नदी सुखल नाहर सुखल बांच गइल झरई।

होत फजीरे जागत नइखन अब किसान
कोयल के कुक आ पराई गइली चिरई।

धनिक के अबो मसलन्द अउरी गदा बा
गरीबन खातिर तोसक अभियो बाटे तरई।

दूध, दही, जूस, छाछ छोड़ पियतालो पेपसी
लिट्टी-चोखा, कढ़ी-बरी छाड़ खात बा लो गरई।

सुनऽ श्रीकरपुरी तुहु लिखऽ-पढ़ऽ भोजपुरी
स्टील,पितर अलमुनियम छोड़ मंगाव तू परई।
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4.

कइसे कइसे नेता जी रास्ता भुलाइ गइल
जनता की भीरी आज अचके में आई गइल।

लागता की अब चुनाव नियराइल बा
भादो जस पियरका बेंग उपराइल बा
आवते जातियन के बाणवा चलाई गइल
जनता की भीरी आज अचके में आई गइल।

भाषण में अपना देखवलऽ सपनवा
बढ़ी गरीब अउरी भारत के किसनवा
सगरो समेट के तू कलम घुमाई गइलऽ
जनता की भीरी आज अचके में आई गइल।

मेनिफेस्टो में डालल रहे विकास के पुड़िया
भारत बन जाइ फिरसे सोने के चिड़िया
जीतते फरार भइल गांव से पराई गइल
जनता की भीरी आज अचके में आई गइल।

कइसे कइसे नेता जी रास्ता भुलाइ गइल
जनता की भीरी आज अचके में आई गइल।
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5.

फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
रात-दिन पोस्ट लिखे, बुझेला अनाड़ी राम
कबो मैसेंजर पर चेटियावे
कबो लागे टैगियावे
देनी हमहू अइसना के, खूबे लाताड़ी राम 
फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
नीमन बाउर पोस्ट लिखे
अश्लीलता के पोछ घिंचे
यूट्यूब पर गाना सुने, बन क के केवाड़ी राम
फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
लाइक के लालसा लगवले
शेयर कॉमेंट पर खुस भइले
नम्बर माँगला पर बिरंगे जइसे, कटले बा हाड़ी राम
फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
नया नया ट्रेंड बाटे 
फेसबुक पर फ्रेंड बाटे
मिले खातिर रोज उ
कबसे बेचैन बाटे
लिखे अइसन बात,ब्लॉक कइले हचाड़ी राम
फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
केतने लोग के भरम होइ
भोजपुरी के करम हई
मन में उचरिहे नाही
तले खाली शरम होइ
आदत छोड़ब नाही,जाइ अगड़ी- पिछाड़ी राम
फेसबुक चलावे लोगवा गजबे खेलाड़ी राम।
गोजा पोकी मत करऽ
पढ़s-लिख मस्त रहऽ
व्यवहार जोगवला में
दिक्कत बा तवन कहऽ
बोलेले गणेश रोजो, मीठ- मीठ बाणी राम
फेसबुक चलावे लोगवा, गजबे खेलाड़ी राम।
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6.

बताऊ ना माई का लिखी
बचपन के प्यार लिखी
की तोर नेह दुलार लिखी
रात के लोरी लिखी की
दूध के कटोरी लिखी
अंगूरी धरा के चलावल लिखी
चाचा चाचा कहवावल लिखी
बताऊ ना माई का लिखी।

अचरा में लुकवावल लिखी कि
गरम पानी से नहवावल लिखी
बुकुआ तेल मिसवावल लिखी
की ग्राइपवाटर पियाववल लिखी
माटी कोड़ के खाइल लिखी
की भकउआ से डेरवावल लिखी
बताऊ ना माई का लिखी।

स्कूल ड्रेस पहिरावल लिखी
की टिपिन पैक करावल लिखी
तोरा हाथ से खियावल लिखी
की आलू आ मीठा भरल रोटी लिखी
दलपीठवा,गोझा पीठा लिखी
की लिट्टी अउरी चोखा लिखी
खिचड़ी के लाई लिखी कि
पुआ रस मलाई लिखी
बताऊ ना माई का लिखी।

कौआ उड़ चिरई उड़ लिखी
कि लूडो छका सापा लिखी
आइस-पाइस मुरैठा लिखी की
चिका खेल कबड्डी लिखी
दसों पिंडी खार कबूतर डेली लिखी
की कल्हुआडे के मीठा भेली लिखी
बताऊ ना माई का लिखी।

बाबा के स्थान लिखी कि 
बहरा जाए कि प्रस्थान लिखी
सऊदी के रुपिया लिखी
मेहनत अउरी धूपिया लिखी
माई रे बड़ी याद आवता तोर
सुन माई अब इहे लिखी
बताऊ ना माई का लिखी।
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7.

गइल जमाना गुली डांटा के,
अब क्रिकेट आइल बा,
हाय हेल्लो के चक्कर मे,
गोड़ लागल भुलाइल बा,
काकी, चाची,मौसी के जगहा पर,
खलिहा आंटी आइल बा,
काका,चाचा, मौसा के जगहा पर,
अंकल नाम रखाएल बा,
माई भइली मॉम अउरी,
बाबूजी पॉप डैड में अझुरइले,
बबुनी दिदिया सीस भइल लो,
भइया भइले ब्रो।

गइल जमाना जूस,छाछ के,
कोकाकोला आइल बा,
वर्गर पिज्जा के चक्कर मे,
लिट्टी चोखा भुलाइल बा,
दलपीठवा त खाइल कम भइल ,
अब ओकरा जगहा मोमोज आइल बा,
पूरी जिलेबी के जगहा पर,
चाट समोसा आइल बा,
शुद्ध मिठाई लड्डू के जगहा पर,
अब केमिकल के रसगुल्ला आइल बा,
मकई के लावा भइले पोपकोर्न,
लइका,लईकी खा के भइले मॉडर्न।

गइल जमाना नोकिया मोबाइल के,
अब त ओप्पो वीवो आइल बा,
ओरकुट के जगह पर अब त,
जुकरबर्गवा फेसबुक लीयाइल बा,
चिठी पाती के जगहा पर,
लोग त वटसपियाईल बा,
बन भइल अब दौरी दोकान,
फ्लिपकार्ट अब आइल बा,
बन भइल दियरी मोमबत्ती,
चाइनीज फुलझड़ी आइल बा,
रक्षासूत्र के जगहा पर,
चाइनीज राखी आइल बा।

गइल जमाना पेड़ पौधा के,
अब त कूलर ऐसी आइल बा,
बाग बगीचा छोड़ के अब,
घर के भीतरी लुकाइल बा,
ट्यूबलाइट के जगहा पर,
अब त led लाइट आइल बा,
बिजली रहत नइखे बाक़िर,
चारु ओर तार तानाइल बा
शराब मिलत बा ऐसी दुकान में,
दूध दर दर घूम के बेचाइल बा,
लोन दियाइल बड़का के घर बइठल,
किसान बैक बैंक भटकत बिलाइल बा,
पढ़ाई में जबसे आरक्षण आइल बा,
शिक्षा के नाम नासाइल बा।
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8.

सुरूज के आगे बदरा बा छवले
बताव प्रभु बूंद बरसी कि नाहीं
धुरिया उड़ान खेत खरिहान बाटे
बताव प्रभु खेत सरसी कि नाहीं।

केहु ना अबले किसानन पो ताकल
जे भइल अगहर उ लूटे में लागल
उहे आज बइठल बा संसद में चुपे
किसानन के मसला खरकी कि नाहीं।
सुरूज के आगे बदरा बा छवले
बताव प्रभु बूंद बरसी कि नाहीं।

इचिको जे देरी लगइब तू बदरा 
बचवन के जिनिगी पो पड़ जाई खतरा
चिरिया चुरूंग सभ आफत में बाड़े
अनबोलता गोहार गेह परसी कि नाहीं।
सुरूज के आगे बदरा बा छवले
बताव प्रभु बूंद बरसी कि नाहीं।

बरखा ना होई त कइसे रोपाई
दाना बिना जान सभकर जाई
घुघुनी बनाके जान खा ता महाजन
बताव प्रभु कर्ज टरकी कि नाहीं।
सुरूज के आगे बदरा बा छवले
बताव प्रभु बूंद बरसी कि नाहीं।
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9.

सांचो माई जिया घबराईल बाटे हो
जबसे दीनवा बिदेस के धराइल बाटे हो
सांचो माई जिया घबराईल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो।

माइ के अचरवा से छाह जवन मिलेला
बबुआ के भाग जिनगी में खूब खिलेला
ईया के कहानी याद आइल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो।

रुपिया कमाये के नशा चढ़े जब रे
घरवा दुआर माई बाबू छुट जाला तब रे
जहाज पर चढेला मन उतराइल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो।

सोचते नोकरिया के बात मोरे माई रे
अइसन बुझाला जइसे बन्हलस कसाई रे
सोची मन मोर सकुचाइल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो।

सांचो माई जिया घबराईल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो
सांचो माई जिया घबराईल बाटे हो
जबसे दीनवा विदेस के धराइल बाटे हो।

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मैना: वर्ष - 7 अंक - 117 (जनवरी - मार्च 2020)

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