फूंकके चलsडगरिया - मृत्युंजय अश्रुज

बबुनी चलs तूं मत बलखाके
गिरीहें चांद सूरज मुरछाके
करs जवानन पर रहम
मत लs बुढवन के धरम
ई खिलत जोबना देखलाके
बबुनी चलs.......

सुन्दरता के तूं दरिया बाडू
यौवन से लहकत सरिया बाडू
ई उमर बडा नाजुक होला
संभल संभल के चले होला
शिकारी बैठल घात लगाके
बबुनी चलs......

झूठा प्रीत तोहसे लगाई
जाल में अपना ली फंसाई
रख दी जीवन नरक बनाके
बबुनी चलs तूं मत बलखाके
गिरीहे चांद सूरज मुरछाके ।
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मृत्युंजय अश्रुज






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