देखनी - सुरेश कांटक

लोकतंत्र में राजा देखनी
बोले ओकर जनाजा देखनी।

मारे खूब रोवै ना देवै
ओकरे बाजत बाजा देखनी।

भवह बोले ना भसुर छोड़े
खुलि के मारत माजा देखनी।

देलें भासन अउर ना कुछो
बाकिर जोर तकाजा देखनी।

कांटक का नीमन का बाउर
कहे कि सभ ह ताजा देखनी।
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लेखक परिचयः-
नाम: सुरेश कांटक
ग्राम-पोस्ट: कांट
भाया: ब्रह्मपुर
जिला: बक्सर
बिहार - ८०२११२

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