संपादकीय

बिरहा गाए - गुलरेज शहजाद

सारंगी के धुन उतराला
करुणा के पानी में भींजल
राग फगुनिया
टपटप टपके
सांसन के लय
थरथर करे
दोसर ओरी
"बोल जोगीरा सs रs रs रs रs"।

बाँचल जाता
बाकिर मनवाँ बहल जाता
करुणा के पानी में भींजल
लय का जवरे
मन में बेचैनी के अदहन
डभकत बाटे
डूबत आ उतराते कसहूँ
रतिया बीतल
खरगोंछाह सूरुज के किरिन
देह जरावे
बाकिर मनवां पसिजल जाए
करुणा में पानी में भींजल
बिरहा गाए
.....................................................
लेखक परिचय:-
नाम - गुलरेज शहजाद
कवि एवं लेखक
चंपारण (बिहार)
E-mail:- gulrez300@gmail.com

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