संपादकीय

एगो पाती सईयाँ जी के नाम - निशा राय

सोस्ती श्री पत्र लिखीं हम सईयाँ जी के नाम,
आ गइल दिनवाँ गरमी के होता कड़ा घाम।
खेतवा में ऊरिद झूराता गिर गइल गेंहूँ के दाम,
आ अपना बारी में चिखहूँ के आईल नईखे आम।
सोस्ती श्री पत्र लिखीं हम सईंयाँ जी के नाम।।
आमा जी के दामा उपटल बाउजी के भइल बोखार,
तिन गो में से दू खोसुवन के ऊठा ले गइल सियार।
आ बरखा के बिछली में गिर के छौंड़ा तुरलस टाँग,
सोस्ती श्री पत्र लिखी हम सईयाँ जी के नाम।।
गऊँवा में 'दुखी' 'जुम्मा' में होला रोज तकरार,
'दुखी' 'जुम्मा' के मार-मार के फोर देहलन कपार।
सरपंच के लइकवा कुछ दिन से बा बेमार,
डाग्डर(डाक्टर) लोगवा कहता बचला के कमे बा आसार।
सोस्ती श्री पत्र लिखी हम सईयाँ जी के नाम।।
अउर सब इहवाँ ठीके बा का लिखीं आपन हाल ,
टूका टूकी जोड़ जाड़ के चलत बा सब कार।
तू कइसे बाड़ इ अगला पाती में बतलइहा ,
हो सके त कुछ रुपया पाती के संगे पेठइहा।
अम्मा बाबू आशीष भेजत हैं लइके करे प्रणाम,
सोस्ती श्री पत्र लिखी हम सइयाँ जी के नाम।।
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लेखक परिचय:-

नाम: श्रीमती निशा राय
पता: रामअवध नगर
पो.-जंगल चौरी,खोराबार 
जि.- गोरखपुर,पिन-273010 
उत्तरप्रदेश
मो न.: 8542898686
mail-rainisha29.nr@gmail.com

अंक - 96 (06 सितम्बर 2016)

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