संपादकीय

हउवा के जात भइल - सरोज सिंह

हउवा के जात भइल बड़ा जुर्म बा
मनवा के बात कइल कड़ा जुर्म बा
भोरे के एलार्म में उ बोलत बिया
काम-काज पहीर के उ डोलत बिया
जिनगी के सूप में फटकात रहेले
कपड़ा के फिचन अस झटकात रहेले
कुकर के सिटी में ऊ चीखsतीया
पोछा के पानी में ऊ भीगsतिया
बेलना से चकला पs बेलात रहेले
लहकत तावा पs रोजो सेंकात रहेले
अधहन में भात नियर पाकsतीया
संजोअल सपना मनेमन हांकsतीया
साजन खातिर सजत संवरत बिया
लईकन के सुख खातिर दउरत बिया
घर अमृत कई के जहर पियत बिया
तब्बो ऊ जिनगी जी जान से जियतीया
हउव्वा के जात भइल बड़ा जुर्म बा
मनवा के बात कइल कड़ा जुर्म बा
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लेखक परिचय:-

नाम: सरोज सिंह
शिक्षा: स्नातकोत्तर (भूगोल) एवं बी एड
पेशा: जॉइंट सेक्रेटर, सी आई एस ऍफ़ के महिला परिवार कल्याण "संरक्षिका "
जनम: बलिया (उ .प्र .)
जनमदिन: 28-01-70
निवास: गाज़ियाबाद
रचना: तुम तो आकाश हो (काव्य संग्रह),
"स्त्री होकर सवाल करती है","सुनो समय जो कहता है" काव्य संग्रह में कवितायें संकलित
हिंदी व भोजपुरी भाषा में लेखन व बँगला कविताओं का अनुवाद 
अंक - 88 (12  जुलाई 2016)

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