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फगुनवा में - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

बियहल तिरिया के मातल नयनवा, फगुनवा में॥ 
पियवा करवलस ना गंवनवा, फगुनवा में॥ 

सगली सहेलिया कुल्हि भुलनी नइहरा। 
हमही बिहउती सम्हारत बानी अँचरा। 
नीक लागे न भवनवा, फगुनवा में॥ 
पियवा ..... 

पियराइल सरसों मटरियो गदराइल। 
फुलल पलास बा महुअवों अदराइल। 
बदले लागल नजर जमनवा, फगुनवा में॥ 
पियवा .... 

नाही सहाला अब भउजी क चिकोरी। 
रही रह रिगावे हमरा धई बरजोरी। 
बीख लागल सगरी कहनवा, फगुनवा में॥ 
पियवा ...... 
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अंक - 72 (22 मार्च 2016)

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