विविध

जनि करिहा - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

बड़ी मेहनत से बनेला ई शान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

कतहू न मिलिहन अइसन देश आ समाज हो 
नहीं पईबा कतहू अइसन मनई खुसमिजाज हो 
इहवें होला संस्कारन के विहान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

ज्ञान अ विज्ञान के जवान इहे देश हो 
दुनिया मे सबसे महान इहे देश हो 
होला इहवें से विकसित अरमान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

हर धरम – करम फुले अ फले इहवाँ 
सनेहिया क गगरी मिलेला ढेर इहवाँ 
एही से बेसी न मिलिहें सम्मान बाबू।
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 

एही के सराहा खाली एकरे के सँवारा हो 
बाउर खियाल नाही केकरो के गंवारा हो 
करिहा देशवा नमन भूली अभिमान बाबू। 
जनि करिहा इजतिया जिआन बाबू॥ 
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अंक - 60 (29 दिसम्बर 2015)

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