संपादकीय

केशव मोहन जी कऽ तीन गो चइता

पिया नाहीं अइले

पीपर पात झरि गइलेs हो रामा,
पिया नाहीं अइले। 
मन के कुसुम कुम्हिलइलेs हो रामा,
पिया नाहीं अइले।
सरसों के फूलवा झरे, मन हहरे,
सुरुज तपे लगले पहिलके पहरे,
हमरा से पपीहो परइलेs हो रामा,
पिया नाहीं अइले।।
अड़ोसिया-पड़ोसिया सभे रति गावें,
कुहूक रोज अँगना कोइलरिया रिगावे,
सुनि के हिया छछनइलेs हो रामा, 
पिया नाहीं अइले।।
अइहें त छुपायेब पुतरी के भीतरी,
दिन-रात बइठल रहब उनके पँजरी,
हरषि हिया हहरइलेs हो रामा ,
पिया नाहीं अइले।।
अइहें पियवा त धरेब भर अँकवारी,
कोइलासिए ना रही बारी के बारी,
सोचि के मदन मन धधइलेs हो रामा,
पिया नाहीं अइले।।
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मोरा अँगनइया

फुदुक चहके ले गौरैया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
अगराइल मन ले बलैया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
पुहुप उगे नया पीपरा के डाढ़ी,
अनरा पर तने लागल फूलवा के साड़ी,
नीक लागे तनिको छैयाँ, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
झीनी चुनरिया में लउके गोल नैना 
रातरानी तहे-तह सजावेली रैना,
छछने मन-पनछुइया नैया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
मोती के मउनी जइसन तीसी पाके,
सोनवा जइसन मटर छिमी से झाँके,
गेहुँवा पर चढ़ल ललइया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
कंत किसनवा के चिंता करे मेहरी, 
पिया बिना गेहुँआ से के भरी डेहरी,
धनि-धरती ले ली अँगड़इया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
मन के तपन में तन के झोहाड़ी,
मीत बिना के झोरी ऊँख के पुआड़ी,
मेहनत हउवे सबके दवाइया, हो रामा,
मोरा अँगनइया।
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बाजे बधाई

कोसिला घरे अइले रघुराई, हो रामा,
बाजे बधाई। 
अवध-कुल गइल अगराई, हो रामा,
बाजे बधाई।
मलीन मन-मानव मंजुल हो जाई 
समवेत स्वर में सब मंगल गाई 
हहरत हियरा फुलाई, हो रामा,
बाजे बधाई।
धनि दशरथ धा के दरसन चाहें,
अन्तर-नयनन से परसन चाहें,
बलि जाले देखि मुसकाई, हो रामा,
बाजे बधाई।
सात सुहागिन मिल सोहर गावें,
धन-दौलत राजा जी लुटावें,
सरजू जी गइली छछनाई,हो रामा,
बाजे बधाई।
राम जी अइले, भरतो जी अइले,
शत्रुघन-सौमित्र जी अइले 
आई गइले चारू भाई, हो रामा,
बाजे बधाई।
मधु-मिठास रही जो बैना में,
राम राज-सपना सजी नैना में,
जीवन सफल हो जाई,हो रामा,
बाजे बधाई।
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लेखक परिचय:-

2002 से एगो साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ के संचालन। 
अनेक पत्र-पत्रिकन में तीन सौ से अधिका लेख 
दर्जनो कहानी, आ अनेके कविता प्रकाशित। 
नाटक लेखन आ प्रस्तुति। 
भोजपुरी कहानी-संग्रह 'कठकरेज' प्रकाशित। 
आकाशवाणी गोरखपुर से कईगो कहानियन के प्रसारण 
टेली फिल्म औलाद समेत भोजपुरी फिलिम ‘कब आई डोलिया कहार’ के लेखन 
अनेके अलबमन ला हिंदी, भोजपुरी गीत रचना. 
साल 2002 से दिल्ली में शिक्षण आ स्वतंत्र लेखन. 
संपर्क – 
पता- तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र. 
kmpandey76@gmail.com
अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)-

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