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जनम देला से ज्यादा पोसे के आग होखेला - समता सहाय

पोसल सुग्गा उड़ जायेला त केतना दुःख होखेला।हमहुँ एगो छोट लड़की मोती-माला के रख के समझ गईनी। बेटा जब छोट रहल त हम घर में कहनी एगो आठ दस बरीस के बच्चा मिल जाइत त बाबू के देखत रहीत त हमरा कुछ आराम मिल जाईत। गाँवे गईनी एगो घरे के जना रहल आपन बेटी अउर मेहरारू लेकर आयिल। हम पूछनी उनका से कई गो बाल-बच्चा बा ?नाम गिनवा दिहली संख्या ना बता पवली। हम त एगो मोती मँगनी उनका लगे पूरा माला रहल ।नाम के हिसाब से सात बेटी अउर एक बेटा रहल। बेटियन के नाम रहल मोती-माला,रूप-माला, फूल माला ,हीर माला ,सोन माला,गीत-माला,मीत -माला अउर बेटा के नाम रहल रुद्रमाल, प्यार से ललनवा कहास। अभी एक बेटा के तमन्ना अउरी रहल काहेकि एगो आँख के आँख ना कहल जाएला! 
हमरा हक़ में अईली मोती-माला। लिया अयिनी, पूरा बनल रहली उनका साथे हमार बेटी अदिति भी बन गईली। पहिले एक सीढ़ी उतरस त हाथ धरके, अउर मोती के साथ पाकर पांच सीढ़ी कूद जास। पूरा फेंटुआ हिंदी बोले लगली बुझाओ कि बलमा-बलेथा से आईल बाड़ी। अउर एने मोती घडी देखल ,कैलेंडर देखल सीख गईली।उनका नाक से अब नोजी आवे लागल अउर बेसी काम कईला पर टायर्ड हो जास। बेटी के सोहबत में पढ़े -लिखल भी सीख गईली। 
एक दिन बेटी कहली मम्मी सब दोस्त मिलके पिकनिक मनाएब। उनकर दोस्त लोग आईल अब मोती लम्बा-चौड़ा डींग हकली उ लोग के सामने। कहली कि तुमलोग तो पिकनिक मनाती हो अउर हम तो गाँव में सब फ्रेंड मिलकर बकरी चराने जाते हैं। हम कहनी अउर कुछ ना बकरिये चरावे के मिलल तहरा के। कहितु कि झूला झूलने जाते है। 
समय बीतल फेर गाँवे गईनी ,मोती अपना समाज में पूरा अंग्रेज हो गईल रहली। उनकर माई पूछली का खईबू मोती त कहली ब्रेड-आमलेट खाएब। चले के बेरा ओकर माई अईली कहली अबकी रूप-माला के लिया जाई,मोती-माला के गाँव के रहन सिखावेके पड़ी। रूप-मालवा जाई त उहो कुल सीख जाई तनी नीमन चीज खायी ।मोती के छोड़े में हमार करेजा मुँह पर आवत रहल,उनका खाइल-पीयल सूझत रहे।गाड़ी में बईठ गईनी कान धयिनी केहुके बच्चा ना धरब।बेटा भी हमार होशियार हो गईल रहे।उनका से कहनी लिया जाएब त मोती-माला के नाहीं त माला फेरे के हमार अभी उमीर नईखे भईल।
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समता सहाय











अंक - 77 (26 अप्रैल 2016)

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