संपादकीय

चइत रे मासेऽऽ

चइत मासे चुनरी रंगा दऽ हो रामा। चइत रे मासेऽऽ॥

चुनरी रंगा दऽ पिया गोटवा लगा दऽ
गोटवा के संगे-संगे चमकी जड़ा दऽ
जहाँ-तहाँ लरी लटका दऽ हो रामा। चइत रे मासेऽऽ॥

अँगुठी गढ़ा दऽ पिया नामवा उगा दऽ
नमवा के साथे-साथे पतवो लिखा दऽ
जहाँ-तहाँ मोटिया लटका दऽ हो रामा। चइत रे मासेऽऽ॥

पायल बना दऽ पिया बिछुआ बना दऽ
बिछुवा के सङगे-सङगे नथिया बना दऽ
जहाँ-तहाँ घुँघरू लगा दऽ हो रामा। चइत रे मासेऽऽ॥
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अंक - 76 (19 अप्रैल 2016)

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