विविध

रसिया रस लूटो होली में

रसिया रस लूटो होली में,
राम रंग पिचुकारि, भरो सुरति की झोली में

हरि गुन गाओ, ताल बजाओ, खेलो संग हमजोली में
मन को रंग लो रंग रंगिले कोई चित चंचल चोली में
होरी के ई धूमि मची है, सिहरो भक्तन की टोली में
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अज्ञात 
अंक - 72 (22 मार्च 2016)

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