संपादकीय

होरी: मन के ॠतु कऽ बसंत

परिचय दास जी के लिखल परस्तुत ललित निबंध "होरी: मन के ॠतु कऽ बसंत" बसंत औरी होली के पछा औरी फइलाव देखावत बा। ए ललित निबन्ध के सहारे होरी औरी बसंत के जिनगी, मन औरी संस्कृति से होखे वाला बतकही जेवन लऊके ला ना औरी अनचिन्ह बा लेकिन असर जिनगी में देखाई देला।
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लेखक परिचय:-

जन्म: रामपुर , देवल आश्रम ,मऊ नाथ भंजन ,उत्तर प्रदेश
भोजपुरी,मैथिली और हिन्दी मे लेखन
20 से अधिक पुस्तकें. कविता,निबंध,आलोचना आदि मे गहन हस्तक्षेप
द्विवागीश सम्मान,श्याम नारायण पांडेय सम्मान आदि 7 सम्मान
'इंद्रप्रस्थ भारती' [हिन्दी] तथा ' परिछन' [मैथिली-भोजपुरी ] पत्रिका का संपादन
मैथिली-भोजपुरी अकादेमी, दिल्ली तथा 
हिन्दी अकादेमी, दिल्ली के सचिव रह चुके हैं.
संपर्क:-
76, दिन अपार्टमेंट्स , सेक्टर -4, द्वारका ,नई दिल्ली-110078
मोबाइल-09968269237
e.mail- parichaydass@rediffmail.com

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