संपादकीय

हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अँखिया से

हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अँखिया से,
चोखे-चोखे बाड़े नयना कोर रे बटोहिया।

ओठवा त बाड़े जइसे कतरल पनवा से,

नकिया सुगनवा के ठोर रे बटोहिया।

दँतवा ऊ सोभे जइसे चमके बिजुलिया से,

मोंछियन भँवरा गुँजारे रे बटोहिया।

मथवा में सोभे रामा टेढ़ी कारी टोपिया से,

रोरी बूना सोभेला लिलार रे बटोहिया।।
---------------- भिखारी ठाकुर
अंक - 20 (24 मार्च 2015)

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