संपादकीय

अंक - 13 (3 फरवरी 2015)

आज रऊआँ सभ के सोझा मैना कऽ तेरहवाँ अंक परस्तुत बा। ।एह अंक में तीन रचनाकार कऽ रचना सामिल बा जेवना में से दू गो काब्य रचना औरी एगो लेख ए अंक बाड़ी सऽ।
- प्रभुनाथ उपाध्याय
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अठवां अनुसूची में सामिल करे खातिर
मान के अंचरा भोजपुरी पर धरे खातिर
काथी बा राउर बिचार
कहीं मोदी जी सरकार।

बात के पुआ बहुते पाकल अब त चेतीं
जे जाएज अधिकार बा अब हमनीं के दे दीं
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सबसे बड़हन सवाल इ बा की केतना लोग आपन मईभासा (भोजपुरी) के लेके एकजुट बा लो? केतना लो क आपन अस्तित्व से मतलब बा? 
केतना लो इ कह के निकल जाला की एकरा फेरा में पड़ के कऊनो खाए के मिले वाला बा। अगर इहे बात झारखण्ड में रहेवाला बंगाली सोचले रहतन त आज झारखण्ड के दूसरा भासा में उर्दू के साथे साथ बंगला ना शामिल भईल रहित। भोजपुरी भासा भासी से बहुत कम लोग बंगाली के झारखण्ड में रहेला... 
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हम भारत के संविधान हईं
दुनिया के सबसे सुनर वेवस्था के बखान हई
अधिकार के दाता हई
इतिहास के भी ईगो गाथा हई
बहुते साहस और क्षमता बाटे हमरा में
पर आज हम खुदे लाचार हई
हम भारत के संविधान हईं।
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