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अंक - 6 (11 अक्टूबर 2014)

आज रऊआँ सभ के सोझा मैना के छऊआँ अंक परस्तुत करत निक लागत बा। पिछिला अंकन नियन एहू अंक में खाली दू गो काब्य रचना बाड़ी सऽ। 
- प्रभुनाथ उपाध्याय 
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हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी 
हमनी के साहेब से मिनती सुनाइबि।
हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते,
हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि।
पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां,
बेधरम होके रंगरेज बानि जाइबिजां,
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कहीं चहकेले चिरई
कहीं ढोल बाजेला!
ना घरे में लागेला मन
ना बने में लागेला!
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