अइले बसन्त - ठाकुर विश्राम सिंह
अइले बसन्त महँकी फइललि बाय दिगन्त, भइया धीरे-धीरे बहेली बयारि। फूलैलें गुलाब, फुलै उजरी बेइलिया, अमवाँ के डरियन पर बोलैली कोइलिया। बोलैले पप...
अइले बसन्त महँकी फइललि बाय दिगन्त, भइया धीरे-धीरे बहेली बयारि। फूलैलें गुलाब, फुलै उजरी बेइलिया, अमवाँ के डरियन पर बोलैली कोइलिया। बोलैले पप...