संपादकीय

चलती के बेरिया - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

निहुरी ओढ़ावे ले चदरिया। चलती के बेरिया।

जवने दिन पडल हमरे ओहरवा 
आई, ठाढ नियरे चारो कंहरवा 
घरवां में रोअत गुजरिया। चलती के बेरिया।

लोर भरी अंखिया, अइनी सहेलिया 
आपन पराया जे निकसल महलिया 
लोर बरसे अस बदरिया। चलती के बेरिया।

सून महल, सून गउवां के गलिया 
मुरझाइल अब बगियन में कलिया 
कहवां हेराइल अंजोरिया। चलती के बेरिया।

साथ संग कुल सभसे छुट गइलें 
हित मीत हमरे नीयरो न अइलें 
असवों गवाइ न कजरिया। चलती के बेरिया।
--------------------------------
अंक - 79 (10 मई 2016)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.