संपादकीय

आवत राम रघुकुल चंद - महेन्द्र मिश्र

आवत राम रघुकुल चंद।
कुशल मंगल सहित-हर्षित लखन जानकी संग।
हरसी बरसहीं सुमन सुरनभ सरजू बढ़त उमंग।
सिद्ध मुनि नरनाग किन्नर सबहीं होत अनंद।
सुयश सुर गंधर्व गावत बाजत सुभग मृदंग।
जयति जय-जय शब्द चहुँ दसि गंग लेत तरंग।
चढ़ि विमान सुजान राजत भालु कपि हैं संग।
धनुष कर सर छविमनोहर अंग-अंग अनंग।
द्विज महेन्द्र सुरूप निरखत भरथ हो गए दंग।
बार-बार उमंग बाढ़त जइसे उदधि तरंग।
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लेखक परिचय:-

नाम: महेंद्र मिश्र (महेंदर मिसिर)
जनम: 16 मार्च 1886
मरन: 26 अक्टूबर 1946
जनम स्थान: मिश्रवलिया, छपरा, बिहार
रचना: महेंद्र मंजरी, महेंद्र विनोद, महेंद्र चंद्रिका, 
महेंद्र मंगल, अपूर्व रामायन अउरी गीत रामायन आदि
अंक - 71 (15 मार्च 2016)

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