सामाजिक समरसता के व्रत हऽ छठ - केशव मोहन पाण्डेय
दियरी-बाती बीत गइल। भाई-टीका के सथवे लगनदेव जागे लगले। अब सबसे पावन परब छठ के तैयारी बा। जहाँ देखीं, ऊहवे छठ के निर्मलता लउकत बा। बाँव-देह...
दियरी-बाती बीत गइल। भाई-टीका के सथवे लगनदेव जागे लगले। अब सबसे पावन परब छठ के तैयारी बा। जहाँ देखीं, ऊहवे छठ के निर्मलता लउकत बा। बाँव-देह...
दलित विचार का बारे में राजनीतिक सोच जतने व्यावहारिक, साफ आ मकसद वाला लउकेला, साहित्यिक सोच ओतने अझुराह, भकुआइल, ठहरल आ भेड़चाल वाला बा. अ...
राउरा नाया-नाया लिखे शुरु कईले बानी। कवनो बात नइखे। राउर लिखल केहु नइखे पढत ओसे आपन लिखल बन मत करी। एकर मतलब ई नइखे कि रउरा लिखे नइखे आवत।...
एक दिन के बात बतावत बानी। फिलिम लाइन से जुड़ल एगो दोस्त हमरा से मिले आइल रहन। खासतौर से भोजपुरी फिलिमन खातिर गीत लिखे के प्रति उनकर ढ़ेर...
मन में घुमे के उछाह, सुन्दरता के आकर्षण आ दू देशन के राजनैतिक सीमा के बतरस के त्रिवेणी में बहत ही हम त्रिवेणी जात रहनी। हमनी के छह संघति...
"इमेभोजा अंगिरसो विरुपा दिवस्पुत्रासो असुरस्य वीराः। विश्वामित्राय ददतो मघानि सहsसावे प्रतिस्तः आयुः॥" इहे उ संस्कृत के श्...
आज़ादी के ६८ साल बादो जदि भोजपुरी के आठवी अनुसूची में, चाहे भारत के पटल पर अगर उचित इज्जत नइखे मिलल त ओकरा पीछे सबसे बड़का कारण भोजपुरिया ...
हर आदमी के केवनो चीझ के ले के आपन राय होला औरी अपना ओ राय खाती एगो तर्क होला औरी हर तर्क के सही साबित करे खाती कुछ सबूत औरी उदाहरन होला।...